Engineers Day 2026: इंजीनियरिंग की नर्सरी बना लखीमपुर खीरी, हर साल 500 युवा भर रहे उड़ान
लखीमपुर खीरी में पॉलिटेक्निक संस्थान हर साल लगभग 500 युवाओं को इंजीनियरिंग क्षेत्र में प्रवेश दिला रहे हैं। यह तकनीकी ...और पढ़ें

HighLights
लखीमपुर के पॉलिटेक्निक संस्थान 500 युवाओं को इंजीनियरिंग में अवसर दे रहे।
तकनीकी शिक्षा व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करती है।
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में पॉलिटेक्निक की महत्वपूर्ण भूमिका।
राकेश मिश्र, लखीमपुर। तराई के इस जिले में अब इंजीनियरिंग का सपना सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। 10वीं के बाद पॉलिटेक्निक में दाखिला लेकर तीन साल में तकनीकी हुनर हासिल करने वाले करीब 500 युवा हर वर्ष इंजीनियरिंग की दुनिया में कदम रख रहे हैं।
जिले के तीन पॉलिटेक्निक संस्थान युवाओं के सपनों को तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक प्रशिक्षण के पंख दे रहे हैं। इनमें लखीमपुर का राजकीय पॉलिटेक्निक पिछले 41 वर्षों से तकनीकी शिक्षा की मजबूत नींव तैयार कर रहा है।
राजकीय पॉलिटेक्निक की खासियत यह है कि यहां पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहती। मशीनों पर काम, प्रयोगशाला में प्रशिक्षण और तकनीकी समस्याओं को समझने का अभ्यास विद्यार्थियों को सीधे रोजगार की जरूरतों से जोड़ता है।
सिविल इंजीनियरिंग के विद्यार्थी सड़क, भवन और अन्य निर्माण कार्यों की तकनीक सीखते हैं तो इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रानिक के विद्यार्थी विद्युत उपकरणों और आधुनिक तकनीक से रूबरू होते हैं। प्लास्टिक मोल्ड इंजीनियरिंग में निर्माण उद्योग के लिए जरूरी तकनीक और फार्मेसी में दवा निर्माण से जुड़ी बारीकियां सिखाई जाती हैं।
पॉलिटेक्निक का डिप्लोमा युवाओं के लिए रोजगार के साथ आगे पढ़ाई का रास्ता भी खोलता है। डिप्लोमा के बाद विद्यार्थी सरकारी विभागों में कनिष्ठ अभियंता सहित विभिन्न तकनीकी पदों की भर्ती में अवसर तलाश सकते हैं। निजी क्षेत्र में भी तकनीकी दक्षता के आधार पर रोजगार के अवसर मिलते हैं।
वहीं आगे पढ़ने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए बीटेक में सीधे द्वितीय वर्ष में प्रवेश का विकल्प भी रहता है। इंजीनियरिंग दिवस पर जिले के ये संस्थान यह संदेश दे रहे हैं कि तकनीकी शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि हुनर के दम पर रोजगार देने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी बड़ा कदम है। ग्रामीण और सामान्य परिवारों के युवाओं के लिए पॉलिटेक्निक कम समय और अपेक्षाकृत कम खर्च में इंजीनियरिंग की मजबूत बुनियाद तैयार कर रहा है।
तकनीकी शिक्षा को रोजगार से जोड़ना जरूरी
राजकीय पॉलिटेक्निक लखीमपुर के प्राचार्य सियाराम कहते हैं कि हुनरमंद युवा ही तकनीकी भारत की असली ताकत पॉलिटेक्निक शिक्षा विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक तकनीकी प्रशिक्षण देती है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थी जिस ट्रेड में प्रशिक्षण ले रहे हैं, उसमें दक्ष होकर निकलें और बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।
तकनीकी शिक्षा युवाओं को रोजगार के साथ स्वरोजगार और उच्च शिक्षा के अवसर भी देती है। आज आवश्यकता इस बात की है कि विद्यार्थी डिप्लोमा को केवल नौकरी पाने की सीढ़ी न मानें, बल्कि अपने हुनर को लगातार विकसित करें। यही दक्ष युवा देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
