लखीमपुर में प्याज, लहसुन, टमाटर और चीनी के दामों में तेज उछाल, बढ़ते खर्च से बिगड़ा घरेलू बजट
लखीमपुर में पिछले दस दिनों में प्याज, लहसुन, टमाटर और चीनी जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं के दामों में भारी उछाल ...और पढ़ें

बढ़ते खर्च से बिगड़ा घरेलू बजट।
HighLights
लखीमपुर में प्याज, लहसुन, टमाटर के दाम दोगुने हुए।
चीनी के थोक और फुटकर भाव में भी तेज वृद्धि।
बढ़ती महंगाई से घरेलू बजट पर सीधा असर।
राकेश मिश्र, लखीमपुर। महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी की रसोई पर सीधा हमला बोला है। सब्जियों से लेकर रोजमर्रा की जरूरत वाली चीनी तक के दामों में बीते दस दिनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा असर लहसुन, प्याज, टमाटर और चीनी की कीमतों में देखने को मिला है। बढ़ते दामों ने मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के सामने घरेलू बजट संभालने की चुनौती खड़ी कर दी है।
मंडी भाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्याज का भाव दस दिन पहले 32 से 35 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर 44 से 50 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। यानी थोक बाजार में ही करीब 12 से 15 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसका असर फुटकर बाजार में और ज्यादा दिखाई दे रहा है। दस दिन पहले 40 से 45 रुपये किलो बिकने वाला प्याज अब 58 से 62 रुपये किलो तक पहुंच गया है।
इसी तरह लहसुन के मंडी भाव आज 170 से 180 रुपये प्रति किलो चल रहे हैं, जबकि फुटकर बाजार में इसके दाम 210 से 230 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। कारोबारियों के मुताबिक दस दिनों के भीतर लहसुन के फुटकर भाव में करीब 30 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाली यह वस्तु अब आम परिवारों के लिए महंगी पड़ रही है।
टमाटर के दामों ने भी उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ाई है। दस दिन पहले जहां टमाटर फुटकर बाजार में करीब 20 रुपये किलो बिक रहा था, वहीं अब इसका भाव 40 से 45 रुपये प्रति किलो हो गया है। यानी कीमत लगभग दोगुने से ज्यादा स्तर पर पहुंच गई है। चीनी भी महंगाई से अछूती नहीं रही। चीनी का थोक भाव 60 से 62 रुपये किलो और फुटकर भाव 65 से 70 रुपये किलो तक पहुंच गया है। दस दिनों में चीनी के दाम में 12 से 15 रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि बताई जा रही है।
लगातार बढ़ती कीमतों का सीधा असर घरों की रसोई पर पड़ रहा है। गृहणियों का कहना है कि महीने का बजट पहले की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। सवाल यह है कि रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हो रही इस तेज बढ़ोतरी पर प्रभावी नियंत्रण कब होगा। आंकड़े बताते हैं कि महंगाई सिर्फ चर्चा का विषय नहीं, बल्कि अब हर दिन रसोई के खर्च में साफ दिखाई देने वाली हकीकत बन चुकी है।
