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लखीमपुर में गन्ने के खेत बने बाघों का ठिकाना, शिकार और छिपने की जगह मिलने से बढ़ी मौजूदगी

Published: Sun, 18 Oct 2026 01:45 PM (IST)

लखीमपुर खीरी के महेशपुर रेंज में गन्ने के खेत बाघों का ठिकाना बन गए हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ गया ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. महेशपुर रेंज में गन्ने के खेत बाघों का नया ठिकाना।

  2. बाघों के हमलों से अब तक 18 लोगों की मौत।

  3. वन विभाग निगरानी और जागरूकता अभियान चला रहा है।

संजय वर्मा, ममरी (लखीमपुर)। महेशपुर रेंज में गन्ने के खेतों में बाघों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। खेतों में घूम रहे बेसहारा गोवंश के अलावा जंगली सूअर, सियार, बंदर और नीलगाय भी बाघों का शिकार बन रहे हैं। वन विभाग जागरूकता और निगरानी अभियान चला रहा है। करीब तीन महीने पहले महेशपुर इलाके के उदयपुर लोनिपुरवा में एक बाघ मृत मिला था। इससे पहले बाघ के हमले में नंदलालपुर के एक युवक की मौत हो गई थी।

29 जून को उदयपुर के काली चरन और 13 जुलाई को तकिया के जसकरन पर गन्ने के खेत में चारा काटते समय बाघ ने हमला किया था। दोनों गंभीर रूप से घायल हुए थे। महेशपुर इलाके में बाघ के हमलों में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। वन विभाग के पास बाघों की मौजूदगी की सटीक जानकारी नहीं है। महेशपुर रेंज पहले से ही बेहद संवेदनशील है और यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार चुनौती बना हुआ है।

बाघों की मौजूदगी के प्रमुख क्षेत्र उदयपुर लोनिपुरवा, बेलवा, आंवला, कठिना नदी का जमुनहा घाट, बिहारीपुर, तकिया, घमहाघाट, अयोध्यापुर और देवीपुर हैं। अधिकांश बाघ जंगल से बाहर गन्ने के खेतों में अपने इलाके बनाए हुए हैं। गन्ने की तैयार फसल में उन्हें स्वच्छंद विचरण और अलग-अलग तरह के शिकार मिलते हैं। इस कारण वे गन्ने के खेतों को छोड़ना नहीं चाहते।

बाघ हमलों की घटनाओं वाले स्थानों पर रेंजर निर्भय प्रताप शाही के नेतृत्व में वनकर्मी कैमरे लगाकर और ड्रोन उड़ाकर बाघों की लोकेशन जानने का प्रयास करते हैं। इसके आधार पर जागरूकता और निगरानी टीमें ग्रामीणों को सतर्क करती हैं। प्रभावित गांवों में एनाउंसमेंट वाहन के जरिए भी लोगों को जागरूक किया गया है।

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