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कभी 10 हजार थी महीने की सैलरी, आज 1 लाख है कमाई; सरकार की इस योजना ने बदल दी यूपी के कुश सिंह की जिंदगी

Published: Thu, 17 Sep 2026 07:00 AM (IST)

लखीमपुर खीरी के कुश सिंह ने मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 5 लाख रुपये का ऋण लेकर अपनी डेयरी और दुग्ध प्रसंस्करण इकाई शुरू की।

कुश सिंह

कुश सिंह

HighLights

  1. कुश सिंह ने 5 लाख के ऋण से डेयरी इकाई शुरू की।

  2. अब प्रतिमाह 1 लाख रुपये कमाते हैं, 15 लोगों को रोजगार दिया।

  3. दूध से खोया-पनीर बनाकर कारोबार को बढ़ाया, प्रेरणा बने।

राकेश मिश्र, लखीमपुर खीरी। कभी दस हजार रुपये महीने की नौकरी करने वाले बिजुआ के मनहरिया गांव के कुश सिंह ने हुनर और मेहनत के बूते अपनी राह खुद बनाई। वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत पांच लाख रुपये का ऋण लेकर डेयरी और दुग्ध प्रसंस्करण इकाई शुरू की।

आज कारोबार से खर्च निकालने के बाद करीब एक लाख रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है और 15 लोगों को रोजगार मिला है। विश्वकर्मा जयंती पर कुश की कहानी गांव में ही रोजगार खड़ा करने की मिसाल है।

नौकरी का अनुभव बना कारोबार की नींव

स्नातक की पढ़ाई के बाद कुश ने पलिया की एक डेयरी में नौकरी की। वहां दूध संग्रह, प्रसंस्करण और बाजार की जरूरतों को करीब से समझा। अपना काम शुरू किया तो शुरुआती चुनौती किसानों का भरोसा जीतना और पर्याप्त दूध जुटाना था। शुरुआत में आय सीमित रही, लेकिन उन्होंने कारोबार को धीरे-धीरे विस्तार दिया। दो हजार लीटर क्षमता का दूध शीतलीकरण संयंत्र लगाया, जिसे एक वर्ष बाद कारोबार की जरूरतों के अनुसार बेच दिया।

अब कुश की चार भैंसों से रोज करीब 30 लीटर दूध मिलता है। इसके अलावा अंबारा, गोरिया, नदवा, ढकिया, इटकुटी और भवानीपुर के संग्रह केंद्रों से करीब छह क्विंटल दूध रोज एकत्र किया जाता है।

दूध से खोया-पनीर तक, बढ़ाई कारोबार की कीमत

कुश ने सिर्फ दूध बेचने के बजाय उसके प्रसंस्करण पर जोर दिया। इकाई में खोया बनाने की दो मशीनें, सात फ्रीजर और पांच वातानुकूलित काउंटर हैं। बुलंदशहर और लखनऊ से मशीनें मंगाकर खोया तैयार किया जाता है। पनीर, लस्सी समेत अन्य दुग्ध उत्पाद भी तैयार कर बाजार में बेचे जा रहे हैं। इससे दूध के कारोबार को अतिरिक्त मूल्य मिला और आय बढ़ी।

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गांव में ही रोजगार की राह

कुश की पहल से दूध संग्रह, प्रसंस्करण और बिक्री की गतिविधियों में 15 लोगों को रोजगार मिला है। कभी दूसरे की डेयरी में दस हजार रुपये की नौकरी करने वाले कुश आज खुद दूसरों के लिए रोजगार का जरिया बने हैं। उनकी यात्रा बताती है कि ग्रामीण संसाधनों को कारोबार से जोड़कर युवा अपनी आय बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार कर सकते हैं।

कुश सिंह ने सरकारी ऋण का उपयोग कर जिस तरह डेयरी और दुग्ध प्रसंस्करण इकाई खड़ी की, वह ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरक उदाहरण है। गांव में उपलब्ध संसाधनों को व्यवसाय से जोड़कर युवा स्वरोजगार के साथ दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है। योजनाओं की जानकारी लेकर युवा छोटी इकाई से शुरुआत कर कारोबार को धीरे-धीरे आगे बढ़ा सकते हैं।

                                            दिनेश श्रीवास्तव, जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी, लखीमपुर खीरी