लखीमपुर के कुंभी में बनेगा देश का पहला बायोप्लास्टिक प्लांट, गन्ने से बनेगी इको-फ्रेंडली प्लास्टिक; खुलेंगे रोजगार के नए द्वार
लखीमपुर के कुंभी में 3080 करोड़ रुपये की लागत से देश का पहला बायोप्लास्टिक प्लांट स्थापित हो रहा है, जो ...और पढ़ें
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HighLights
कुंभी, लखीमपुर में 3080 करोड़ का बायोप्लास्टिक प्लांट स्थापित।
गन्ने, चीनी और शीरे से बनेगा पर्यावरण-अनुकूल प्लास्टिक दाना।
स्थानीय युवाओं को रोजगार, औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा।
विकास शुक्ला, गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर)। कुंभी में करीब 3080 करोड़ रुपये की लागत से बायोप्लास्टिक प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। व्यापार और सेवा क्षेत्र को भी इससे लाभ मिल सकता है। करीब 135 एकड़ में बन रहे प्लांट के साथ लगभग 200 एकड़ में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव है।
इससे परिवहन, माल ढुलाई, निर्माण और रखरखाव जैसी सेवाओं को गति मिलने की संभावना है। आसपास के छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और परिवहन संचालकों को भी लाभ हो सकता है। यह देश का इकलौता प्लांट होगा। औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने के बाद यहां कई दर्जन फैक्ट्रियां लगने का अनुमान है। प्लांट में गन्ने, चीनी और शीरे से पर्यावरण-अनुकूल प्लास्टिक के दाने बनाए जाएंगे।
गन्ने का रस, शीरा और खोई कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होंगे। गन्ने की शर्करा के किण्वन से लैक्टिक एसिड बनेगा। फिर इसे लैक्टाइड में बदलकर बेल्जियम से लाए गए साइकिलाइजेशन रिएक्टर की मदद से पीएलए बनाया जाएगा। मशीन इससे प्लास्टिक के छोटे दाने तैयार करेगी। शुरुआती दौर में रोजाना करीब 80 हजार टन उत्पादन का अनुमान है। इससे सिंगल-यूज प्लेट, कप, गिलास, चम्मच, कांटे, कैरी बैग और बोतलें बनाई जा सकती हैं।
अनुकूल परिस्थितियों में ये उत्पाद तीन से छह महीने में मिट्टी में गलकर खाद बन जाते हैं।कुंभी चीनी मिल के यूनिट हेड डा. सुनील कुमार यादव ने बताया कि बलरामपुर चीनी मिल लिमिटेड के इस प्लांट में नौकरी के लिए कंपनी के कैरियर पेज पर रिक्तियां देखी जा सकती हैं और आनलाइन बायोडाटा जमा किया जा सकता है।
तहसीलदार अरुण कुमार सिंह के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्र के लिए उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) किसानों की भूमि अधिग्रहित कर रहा है। अब तक 250 से अधिक किसानों की 130 एकड़ भूमि के करीब 100 बैनामे हो चुके हैं। इसके अलावा 8.7 एकड़ ग्राम समाज की भूमि है। शेष भूमि जल्द अधिग्रहित की जाएगी। प्लांट के बाद अधिग्रहित भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा।
