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गन्ने से बनाएगा प्लास्टिक, उत्तर प्रदेश के इस शहर में लगा देश का पहला बायोपॉलिमर प्लांट

By Sakshi GuptaEdited By: Sakshi Gupta
Published: Thu, 15 Oct 2026 12:16 PM (IST)

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में भारत का पहला बड़े पैमाने का बायोपॉलिमर प्लांट स्थापित हो रहा है। यह प्लांट ...और पढ़ें

ये तस्वीर AI द्वारा जनरेट की गई है।

ये तस्वीर AI द्वारा जनरेट की गई है।

HighLights

  1. लखीमपुर खीरी में भारत का पहला बायोपॉलिमर प्लांट।

  2. गन्ने से बनेगा पर्यावरण-अनुकूल पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) प्लास्टिक।

  3. ₹2,850 करोड़ निवेश, हजारों रोजगार, अक्टूबर 2026 तक शुरू।

साक्षी गुप्ता, लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में भारत की पहली बड़े पैमाने की बायोपॉलिमर (Biopolymer) निर्माण सुविधा स्थापित की जा रही है, जो कि हरित विनिर्माण और सतत विकास (Sustainable Development) के क्षेत्र में देश को एक नई पहचान दिलाएगी।

लखीमपुर खीरी (कुंभी) में बन रहा बायोप्लास्टिक (बायोपॉलिमर) प्लांट गन्ने से पर्यावरण-अनुकूल प्लास्टिक का उत्पादन करेगा। इस प्लांट में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली का उपयोग किया जाएगा और यह पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होगा।

आसान भाषा में समझें तो इसमें गन्ने के रस यानी शर्करा और वेस्ट पदार्थों का उपयोग किया जाएगा। इसकी मदद से लैक्टाइट के जरिए पीएलए (PLA - Polylactic Acid) रेजिन तैयार किया जाता है। इस रेजिन से ऐसे प्लास्टिक उत्पाद बनाए जाते हैं जो आसानी से नष्ट हो जाते हैं और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते।

परियोजना का शिलान्यास और प्रमुख विवरण

उत्तर प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस अत्याधुनिक बायोपॉलिमर प्लांट का शिलान्यास सीएम योगी ने फरवरी 2025 में किया था। बायोपॉलिमर प्लांट खीरी स्थित कुंभी चीनी इकाई के परिसर में स्थापित किया जा रहा है। 

प्लांट में कितने का किया जा रहा निवेश? 

इस ग्रीनफील्ड परियोजना में लगभग 2,850 से 3,080 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। यह प्लांट अक्टूबर 2026 तक पूरी तरह से कार्यरत होकर अपनी पहली बड़े पैमाने की बायोपॉलिमर सुविधा का व्यावसायिक संचालन शुरू कर देगा। बता दें कि इस परियोजना को 'बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड' द्वारा विकसित किया जा रहा है।

कंपनी इस उत्पाद श्रृंखला को अपने विशेष ब्रांड 'बलरामपुर बायोयुग' (Balrampur Bioyug) के तहत बाजार में उतारेगी। 

प्लांट के उत्पादन क्षमता के बारे में

इस अत्याधुनिक प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 80,000 टन पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) होगी। इतनी बड़ी मात्रा में जैविक प्लास्टिक का उत्पादन देश में पारंपरिक प्लास्टिक पर निर्भरता को काफी हद तक कम करने में सक्षम होगा।

पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

पॉलीलैक्टिक एसिड एक जैव-अवक्रमणीय बायोप्लास्टिक है। इसका निर्माण नवीकरणीय जैविक संसाधनों (जैसे गन्ना, मक्का या चीनी उद्योग के उप-उत्पादों) से किया जाता है।

PLA आधारित सामग्री का उपयोग दैनिक जीवन की विभिन्न वस्तुओं को बनाने में किया जा सकता है, जैसे-

  • डिस्पोजेबल प्लेट्स, कप और कटलरी
  • पानी और पेय पदार्थों की बोतलें
  • स्टेशनरी उत्पाद जैसे पेन
  • सामान ले जाने वाले कैरी बैग्स (Carry Bags) और पैकेजिंग मटेरियल   

इसको कुछ इस तरीके से समझ सकते हैं कि पारंपरिक प्लास्टिक जहां साल दर साल तक मिट्टी और पानी में सड़ता नहीं है। साथ ही साथ विषैले और जहरीले तत्त्व भी छोड़ता है, वहीं PLA से बने उत्पाद तीन से छह महीनों में विघटित होकर पर्यावरण में वापस मिल जाते हैं, जिससे लैंडफिल और महासागरों पर कचरे का बोझ नहीं बढ़ता।

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किसानों को भी मिलेगा लाभ

चीनी उद्योग के उप-उत्पादों और कृषि अवशेषों का बायोपॉलिमर निर्माण में उपयोग होने से स्थानीय गन्ना किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। साथ ही साथ कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

रोजगार के भी बढ़ेंगे अवसर

इस विशाल ग्रीनफील्ड परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हज़ारों युवाओं के लिए तकनीकी व गैर-तकनीकी रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

इस प्लांट के लिए बेल्जियम से मंगाया गया है वेसल

इस प्लांट के लिए बेल्जियम से करीब 200 टन वजनी और 41 मीटर लंबा वेसल मंगाया गया है। जो 308 पहियों वाले ट्रक पर लादकर खीरी जिले में लाई जा रही है।

200 टन के वेसल की खासियत, बेल्जियम से ही क्यों मंगाना पड़ा इतना बड़ा बॉयलर
 
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रास्ते में सुविधा के अनुसार इस ट्रक के कुछ पहिए कम किए गए हैं और अब यह लगभग 250 पहियों के सहारे अपनी मंजिल की तरफ बढ़ रहा है।