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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 27, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन

By JagranEdited By:
Published: Sat, 27 Nov 2021 10:30 PM (IST)

-महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए लागू की गई है यह योजना

पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन
पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन

लखीमपुर : ग्रामीण महिला शक्ति के उन्नत गन्ना बीज वितरण कार्यक्रम योजना के कुशल संचालन के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जिनमें महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन गन्ना विकास परिषद को इकाई मानते हुए पहले आओ पहले पाओ के आधार किया जाएगा।

गन्ना आयुक्त के यहां से जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि गन्ना बीज वितरण कार्यक्रम योजना में ग्रामीण स्तर पर 15 से 40 महिलाओं का स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा सकता है। जिनमें न्यूनतम 10 और अधिकतम 30 महिलाएं हो सकती हैं। इन महिलाओं को सिगल बड तथा बड चिप से गन्ने की उन्नत किस्मों की नर्सरी तैयार कर उससे सीडलिग का वितरण सुनिश्चित कराकर गन्ना बुआई का आच्छादन बढ़ाना तथा त्रिस्तरीय गन्ना बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत पौधशालाओं का अधिष्ठापन एवं बीज वितरण कराने का कार्य मुख्य रूप से शामिल है। स्वयं सहायता समूह के गठन के लिए परिषद को इकाई मानते हुए पहले आओ पहले पाओ का आधार बनाया गया है।

बड चिप विधि से उत्पादित सीडलिग पर अधिकतम 1.50 रुपये प्रति सीडलिग तथा सिगल बड विधि से उत्पादित सीडलिग पर अधिकतम 1.30 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। जारी आदेशों के मुताबिक अ श्रेणी की गन्ना विकास परिषदें 60 लाख, ब श्रेणी की गन्ना विकास परिषदें 40 लाख और स श्रेणी की गन्ना विकास परिषदें 25 लाख का अनुदान अपने संसाधनों से वहन करेंगी। 37 गन्ना बाहुल्य जिलों में यह योजना संचालित है और लाभकारी सिद्ध हुई है। जारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 2904 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन कर 5760 महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराया गया है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार के गन्ना विभाग ने यह योजना लागू की है।