लखीमपुर : शनिवार को तिकुनिया कोतवाली अंतर्गत मजरापूरब के दुमेड़ा गांव में खेत में गन्ने की पत्ती काट रहे किसान राममूर्ति की बाघ के हमले में हुई मौत के बाद आक्रोशित हुए ग्रामीणों व भारतीय किसान मोर्चा की मांगों पर वनाधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद मामला करीब रात नौ बजे शांत हुआ।

बाघ द्वारा डेढ़ वर्ष के अंदर अंजाम दी गई कई घटनाओं के बाद से यहां के ग्रामीण वनाधिकारियों पर गुस्से में थे। तभी शनिवार को बाघ द्वारा दुमेड़ा निवासी किसान राममूर्ति को मार देने की घटना से यहां के ग्रामीणों में उबाल आ गया। गुरमीत सिंह रंधावा के नेतृत्व में भारतीय किसान मोर्चा के लोग भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीण व किसान मोर्चा के लोग अपनी मांगों को मनवाने के लिए शव को लेकर बैठ गए थे। मौके पर मौजूद वन विभाग के डीडी बफर जोन सुंदरेस कुमार, एसडीओ जगदंबिका प्रसाद श्रीवास्तव व एसडीएम निघासन श्रद्धा सिंह ने आक्रोशित ग्रामीणों व किसान मोर्चा के लोगों से बातचीत की।

ग्रामीण व किसान मोर्चा के लोग पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद, एक सदस्य को नौकरी, जंगल के चारों ओर इलेक्ट्रिक फेंसिग, बाघ को पकड़कर जंगल में छोड़ने इत्यादि की मांग पर अड़े हुए थे। वनाधिकारियों की ओर से दिए गए आश्वासन पर मामला शांत हुआ। डीडी बफर जोन सुंदरेस कुमार ने बताया कि पीड़ित परिवार के किसी एक सदस्य को डेलीवेज की नौकरी पर रखा जाएगा। शासन व व‌र्ल्ड वाइड फंड से नियमानुसार पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद दी जाएगी। इलेक्ट्रिक फेंसिग के सवाल पर उन्होंने बताया यह उनके प्रस्ताव में है। इसके लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से अनुमति ली जाएगी।

डीडी बफर जोन सुंदरेस कुमार का कहना है कि बाघ आदमखोर होता तो बाडी को छोड़ता ही नहीं और 40 प्रतिशत बाडी को खा डालता लेकिन, ऐसा नहीं हुआ है। इसलिए बाघ को आदमखोर नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि जंगल के समीप खेतों में काम करने के लिए लोग अकेले जाते हैं। ऐसे में घटना की संभावना ज्यादा होती है। लोगों को कम से कम दो-तीन लोगों के ग्रुप में जाना चाहिए। आवाज करते रहना चाहिए।

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