लखीमपुर, जेएनएन। विश्व विख्यात दुधवा टाइगर रिजर्व एक बार फिर चर्चा में है। यहां पर दुर्लभ प्रजाति का सांप रेड कोरल कुकरी (वैज्ञानिक नाम-ओलीगोडन खेरीयेन्सिस) पाया गया है। सालों पहले यह सांप दुधवा में देखे गए थे लेकिन बाद में लुप्त रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि खीरी में 85 सालों के बाद इस प्रजाति का सांप नजर आया है। दुधवा में एम स्ट्रिप ऐप पर आधारित पेट्रोलिंग लगातार की जा रही है। इसी पेट्रोलिंग के दौरान दुर्लभ प्रजाति का सांप नजर आया। उल्लेखनीय है कि सांप की लाल मूंगा प्रजाति के गुण धर्म से दुनिया लगभग अनभिज्ञ है। अब इस सांप के रहन-सहन, हावभाव, वासस्थल और इसकी प्रजाति विकसित करने की संभावनाओं के बाद इसका वर्गीकरण कराया जाएगा।

कहां कहां कब कब देखा गया

  • पहली बार 1936 में उत्तरप्रदेश के लखीमपुर-खीरी में देखा गया
  • 2014 में खटीमा के सुरई रेंज में किसी वाहन से कुचला मिला।
  • दशकों बाद 2010 में नेपाल के चितवन नेशनल पार्क में दिखा।
  • 2011 में लाल मूंगा सांप कुकरी असोम में देखने को मिला।
  • 2019 में लाल मूंगा कुकरी सांप यूपी के लखीमपुर देखा गया।

1936 के बाद अब नजर आया सांप 

सोनारीपुर रेंज में गश्त कर रेंज अधिकारी गिरधारी लाल, वायरलेस ऑपरेटर अशोक कुमार, फारेस्टर अशोक कुमार को जंगल के मध्य से निकली रेलवे लाइन के पास एक दुर्लभ प्रजाति का सांप नजर आया।  जिसकी तस्वीरें तुरंत ही रेंज अधिकारी ने उतारनी शुरू कर दी।  जिसके आधार पर इस सांप की पहचान दुर्लभ प्रजाति के रेड कोरल कुकरी के रूप में विशेषज्ञों द्वारा की गई। खीरी में यह सांप 1936 में नजर आया था लेकिन हाल फिलहाल दुधवा या फिर आस पास के जंगलों में इस प्रजाति का सांप देखने को नहीं मिला। हालांकि कुछ वर्षों पहले पड़ोस के जिले बहराइच स्थिति कर्तनियाघाट में जरूर उसके देखे जाने की बात कही गई थी।  

सांप ढूंढने वाली टीम को सम्मान

डिप्टी डायरेक्टर महावीर कौजलगि ने बताया कि आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर दुधवा जंगल की गश्त को सुदृढ़ किया गया है। उच्चाधिकारियों का भी जोर इस बात पर है किस तरह से नई तकनीक को हम दुधवा जंगल में लागू कर सकते हैं। इस तरह की पेट्रोलिंग का मकसद यही है कि जो भी चीज, गतिविधि नजर आए उसका लाइव अपडेट दिया जाए। ऐम स्ट्रिप ऐप से ही यह सम्भव हो सकता है। जल्द ही दुर्लभ प्रजाति के सांप को ढूंढने वाली टीम को सम्मानित किया जाएगा।

शर्मीले स्वभाव का होता रेड कोरल

रेड कोरल प्रजाति का सांप शर्मीले स्वभाव को होता है। यह सांप जहरीला नहीं होता और न ही जल्दी काटता है। रात में ज्यादा सक्रिय होता है और खुले में रहना पसंद करता है। बहुत ठंड होने व बरसात के समय चूहे के बिल या पेड़ आदि में बनी सुरक्षित जगह में रहता है। यह कोबरा की तरह फन नहीं निकाल सकता है। रेंगने वाले छोटे कीड़े इसका भोजन होते हैं।

Posted By: Nawal Mishra

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