लखीमपुर : हाल में हुई दो घटनाओं ने भारत-नेपाल खुली सीमा की संवेदनशीलता की ओर सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान फिर से खींच लिया है। इसके चलते 120 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल सीमा पर अब खास चौकसी बरती जाएगी। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को इसके लिए खास ताकीद मिली है।

लखीमपुर, बहराइच, सिद्धार्थनगर, महराजगंज आदि जिलों से सटी नेपाल सीमा तस्करी के लिए पहले से कुख्यात रही है। पूर्व में इस सीमा से कई दुर्दात आतंकियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए यहां की सुरक्षा का जिम्मा एसएसबी को दिया गया है। नेपाल और फिर लखीमपुर में टेरर फंडिंग नेटवर्क से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी ने इसे फिर से खुफिया एजेंसियों के रडार पर ला दिया। इसी बीच हिदूत्ववादी नेता कमलेश तिवारी के हत्यारोपितों के इसी सीमा से भागने की कोशिश करके इस ओर पुलिस के कान खड़े कर दिए। पुलिस ने शासन को इस बाबत रिपोर्ट भेजी। इसमें बताया कि सीमा क्षेत्र में दूसरे जिलों के लोगों ने रिहाइश बनाने के साथ दुकानें भी खोल रखी हैं। इसके बाद पुलिस को सीमा क्षेत्र में वृहद सत्यापन अभियान छेड़ने का निर्देश मिला है। सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों का पूरा लेखा-जोखा जल्द ही पुलिस के पास होगा। नेपाल सीमा की संवेदनशीलता की बाबत शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। बॉर्डर से सटे इलाकों में बड़ी संख्या में बाहरी लोगों के रहने और दुकानें आदि करने की सूचना है। जल्द ही लोगों का सत्यापन कराया जाएगा। होटलों पर भी खास निगाह रखी जा रही है। सीमा पर चौकसी भी कड़ी कर दी गई है।

एसके माथुर, एडीजी सीबीसीआइडी

(नोडल पुलिस ऑफिसर लखीमपुर)

Posted By: Jagran

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