लखीमपुर : सीएचसी गोला में जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते चिकित्सीय सेवाएं महज प्राथमिक उपचार के बाद रेफरल सेंटर बनकर रह गई हैं। एक्सरे मशीन सहित कई उपकरण देखरेख के अभाव में कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। जिम्मेदारों का एक रटा रटाया उत्तर है कि मशीनों को बदलने, सही कराने के लिए लिख दिया गया है। बजट होने पर ही मशीनें सही हो सकेंगी।

प्रचार-प्रसार के अभाव में दम तोड़ रही यूनानी पद्धति

सीएचसी में यूनानी पद्धति से भी उपचार की सुविधा है। इसमें डायबिटीज से लेकर अन्य असाध्य रोगों के उपचार की व्यवस्था है। मौजूदा वक्त में तकरीबन पांच दर्जन मरीज ओपीडी में आते हैं। प्रचार-प्रसार के अभाव में इस पैथी की दवाएं व स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी के बाद भी लोग इसका लाभ लेने में पूरी तरह से अनभिज्ञ हैं। इस पैथी से उपचार व्यवस्था के लिए डॉ. मोहम्मद सुहैल, डॉ. साजिया, फार्मासिस्ट अब्दुल कादिर, जावेद अहमद तथा योगा से उपचार की विधा सिखाने के लिए डॉ. जितेंद्री वर्मा तैनात हैं।

मशीन खराब फिर भी वेतन ले रहे स्वास्थ्य कर्मी

मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए शासन द्वारा दशकों पूर्व उपलब्ध कराई गई एक्सरे मशीन दस वर्ष पूर्व निष्प्रयोज्य घोषित कर दी गई। पिछले दो वर्षों से मशीन पूरी तरह से बंद हो चुकी है। इससे जुड़े स्वास्थ्य कर्मी बिना कार्य के भारी-भरकम वेतन ले रहे हैं।

जिम्मेदार की सुनिए

इस मामले में सीएचसी अधीक्षक डॉ. केके आदिम ने बताया कि एक्सरे मशीन की खराबी के संदर्भ में उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जा चुका है। एक्सरे मशीन से जुड़े कर्मचारियों से अन्य विभागीय कार्य लिए जा रहे हैं।

Posted By: Jagran

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