लखीमपुर : अनलॉक के दूसरे दिन ही लखीमपुर डिपो के बस मालिकों ने भी अपनी बसों का लाक डाउन कर दिया। कारण, उनका पूरा पैसा न मिल पाना था। बस मालिकों का तर्क है कि उन्हें जब पैसा ही नहीं मिल पा रहा है, तो वे बस अपनी जेब से कैसे चलाएंगे। एक दिन के बस संचालन में लखीमपुर डिपो की 80 बसों में से मात्र 40 बसें ही चल पाई। वह भी किसी में एक तो किसी में चार सवारी किसी में छह सवारी। एक दिन में महज 500 से 800 रुपये तक प्रति बस की इनकम होते देख बस मालिकों ने दूसरे ही दिन एआरएम एसपी सिंह को लिखित पत्र दे दिया कि इतना नुकसान सहकर वे अपनी अनुबंधित बसें किसी कीमत पर नहीं लगाएंगे।

एआरएम एसपी सिंह ने भी बताया कि पहले दिन सवारियां काफी कम मिल पाई। लॉकडाउन के चलते लोगों ने अपने कार्यक्रम ही निरस्त कर रखे हैं,ऐसे में सवारियां मिल पाना मुश्किल हो रहा है। हर रोज रोडवेज को जहां 10 लाख रुपए मिलते थे, वही एक जून को पहले दिन बसों के संचालन में सिर्फ 55हजार रुपये ही मिल पाए ऐसे हालात में बस मालिकों का तर्क भी सही है कि रोडवेज की बसें कैसे चले। बस मालिक प्रेम वाजपेई बताते हैं कि प्रत्येक बस पर 4000 रुपये का खर्चा आता है, 1200 रुपये राजस्व देना होता है,ऐसे में अपनी जेब से बसें कैसे चलाई जा सकती है।पूरे दिन लखीमपुर डिपो की बसें नहीं चलीं।रही सही दो-चार की संख्या में जो सवारियां थी वे सीतापुर या लखनऊ डिपो की बसों से आते जाते रहे।

Posted By: Jagran

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