लखीमपुर: बफरजोन के धौरहरा रेंज में करामाती लेखपाल की कारगुजारी से अधिकारियों की नींद उड़ गई है। लेखपाल ने वन ब्लॉक मिलिक में 700 ग्रामीणों को 285 हेक्टेयर रिजर्व ़फारेस्ट की जमीन नाप दी। वर्ष 2019 में किए गए इस फर्जीवाड़े का खुलासा रेंजर की रिपोर्ट से हुआ है। पूरे मामले में राजस्व अभिलेखों की पुष्टि हुई है। डीडी बफर जोन डॉ. अनिल पटेल ने लेखपाल सहित जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए डीएम को चिट्ठी लिखी है।

अधिकारियों के मुताबिक मिल्क ब्लॉक का कुल क्षेत्रफल 710.369 हेक्टेयर है। धौरहरा में आरक्षित वन भूमि टुकड़ों में बिक्री हुई है। पिछले वर्ष राजस्व विभाग ने करीब 700 लोगों को वन विभाग की जमीन पर पट्टा आवंटित कर दिया। रेंजर की रिपोर्ट में इलाकाई लेखपाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। राजस्व अभिलेखों में जो जमीन वन विभाग के नाम दर्ज है लेखपाल ने जानबूझकर उसी जमीन का पट्टा कर दिया। राजस्व के संबंधित अधिकारियों से इसकी पुष्टि भी हुई है। डीडी बफरजोन डॉ. अनिल पटेल ने मिलिक वन ब्लॉक को चिहित करते हुए डीएम को पत्र भेजा है और इलाकाई लेखपाल पर विधिक कार्रवाई की सिफारिश की है। वनभूमि पर पट्टा करना, कब्जा करना, ठेके पर देना दंडनीय अपराध है।

पहले भी करते रहे हैं मनमानी

धौरहरा में तैनात लेखपाल पहले भी मनमानी करते रहे हैं। इसी रेंज के जंगल मटेरा में 20 हेक्टेयर व गौढ़ी में 25 हेक्टेयर वनभूमि पर पट्टा आवंटित कर दिया था। अभिलेखों की पड़ताल के दौरान खुलासा हुआ तो अधिकारियों ने बाद में सभी निरस्त किए।

जिम्मेदार की सुनिए

डीडी डॉ. अनिल पटेल का कहना है कि रेंजर की रिपोर्ट आने के बाद लेखपाल पर कार्रवाई के लिए डीएम को पत्र भेजा जा रहा है। मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

Posted By: Jagran

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