पलियाकलां (लखीमपुर) : नदी कटान से पैदा हुए जख्मों को इतनी जल्दी भरा नहीं जा सकता, लेकिन उस पर मरहम लगाने की कवायद तहसील प्रशासन ने जरूर शुरू कर दिया है। कटान पीड़ित सड़कों के किनारे इधर-उधर डेरा डाले हुए हैं। जिनको राहत सामग्री वितरित करने के साथ ही जीवन बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जंगल नंबर सात के दो किसानों की मौत हाल ही में हो गई है। एक ने आत्महत्या कर ली जबकि दूसरे की मौत का कारण दिल का दौरा था। इन किसानों की खेती योग्य जमीन, मकान सब कुछ शारदा ने निगल लिया।

दोनों पर बैंक का लोन भी था। ऐसे में यह माना जा रहा है कि कटान पीड़ितों को ढांढस बंधाने के साथ इस मुश्किल हालात में कैसे जीवन को पटरी पर लाएंइसके प्रति जिम्मेदारी से काम करने की जरूरत है।

तहसील पहुंची राहत सामग्री

कटान पीड़ितों को राहत किट का वितरण किया जा रहा है। जबकि विधायक रोमी साहनी द्वारा भी यहां भंडारे की व्यवस्था की गई है। तहसील में मंगलवार को राहत सामग्री भरे वाहन पहुंचे। जिसमें लईया आलू, नमक, दालें, माचिस, मोमबत्ती आदि शामिल है। इसका वितरण भी लगातार किया जा रहा है।

मुश्किल हालात में कैसे जिएं, दिया प्रशिक्षण

एसडीएम सुनंदू सुधाकरन ने बताया कि कटान पीड़ितों के लिए यह समय वाकई मुश्किल है। हम उनकी मदद का प्रयास कर रहे हैं। आवास और जमीन देकर बसाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। उससे पहले कटान पीड़ितों के भीतर नई ऊर्जा और जीवन जीने की उमंग भरने का प्रयास किया जा रहा हैं। एनडीआरएफ टीम द्वारा भी उन्हें ऐसे हालात में कैसे रहना है इस बारे में प्रशिक्षण दिया गया, यह प्रशिक्षण आगे भी जारी रहेगा। एसडीएम ने बताया कि प्रकाश व्यवस्था के लिए यहां चार सोलर लाइट लगवाई गई हैं।

जिम्मेदार की सुनिए

कटान ने काफी नुकसान पहुंचाया है। उसे भूल हमें कटान पीड़ितों पर ध्यान

देने की जरूरत है। ऐसा ही किया जा रहा है। राहत सामग्री वितरण लगातार जारी है। साथ ही स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। एक रोज पहले जिस किसान ने आत्महत्या की थी उनके परिवारीजनों को मदद दिलवाई जाएगी। कटान पीड़ित जहां बसे हैं वहां सोलर लाइट लगवा दी गई हैं। एनडीआरएफ की टीम भी प्रशिक्षण दे रही है।

सुनंदू सुधाकरन, एसडीएम, पलियाकलां

Posted By: Jagran