लखीमपुर: एक बार सब कुछ बर्बाद होने के बाद किसी तरह दोबारा परिवार को खड़ा किया था, लेकिन घाघरा नदी के कहर ने यहां भी पीछा न छोड़ा। देखते ही देखते चार हेक्टेयर जमीन घाघरा लील गई। अब घर पर भी नदी का निशाना है। यह त्रासदी ग्राम मोटेबाबा की 65 साल की फूलमती बर्दाश्त नहीं कर सकी। गुरुवार तक खेती की जमीन का आखिरी टुकड़ा भी नदी में समाने के बाद वह सुबह से बिलख कर रो रही थी। दोपहर तक उसकी सांसों ने उसका साथ छोड़ दिया।

रामनगर बगहा का मोटेबाबा गांव में चार साल पहले घाघरा नदी पूरी तरह नेस्तनाबूत कर चुकी थी। इस गांव के परिवार दूसरी जगह बस गए थे और इस गांव का नाम भी मोटेबाबा रखा था। इन परिवारों में फूलमती का परिवार भी था। उसके पति बालेश्वर की मौत हो चुकी थी। एक बेटा कोटेदार है। बाकी खेती पर निर्भर थे। फिर घाघरा इस नए गांव की तरफ घूमी। सैकड़ों हेक्टेयर खेती की जमीन निगल गई। इसमें फूलमती की कुल चार हेक्टेयर जमीन भी थी। फूलमती इस सदमे को झेल न सकी। गुरुवार को रोते - रोते हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई। अब पीछे पूरा परिवार तबाही के मुहाने पर खड़ा है। .. तो प्रशासन को नजर नहीं आ रहा घरों में घुसा बाढ़ का पानी

दो दिन पूर्व पहाड़ों पर हुई मूसलधार बारिश के बाद उफनाई मोहाना नदी के चलते बाढ़ का पानी तिकुनिया के ग्राम चौगुर्जी व नया पिड के तमाम घरों में भी घुस गया था लेकिन, लेखपाल ने तहसील प्रशासन को भेजी अपनी रिपोर्ट में घरों में घुसे बाढ़ के पानी को पूरी तरह नकार दिया। लेखपाल तहसील प्रशासन को अपनी रिपोर्ट के माध्यम से गुमराह करने में लगे हुए हैं।

बाढ़ पीड़ितों की मदद की बजाय लेखपाल की कार्यशैली से बाढ़ पीड़ितों का मजाक उड़ रहा है। मंगलवार को मोहाना नदी की बाढ़ का पानी तिकुनिया के ग्राम चौगुर्जी व नया पिड में घुस गया था हालांकि बाढ़ का पानी पूरी तरह गांव के अंदर नहीं घुसा था। निचले इलाकों में बसे तमाम घरों में घुसने के साथ ही बाढ़ का पानी मार्गों पर भर गया था। नया पिड निवासी प्रेम सिंह, गुरुनाम सिंह, भगवान सिंह, अक्की सिंह आदि के घरों के अंदर भी बाढ़ का पानी घुस गया था। इन बाढ़ पीड़ितों ने बमुश्किल अपने घरों का सामान ऊंचे पर रखकर नुकसान होने से बचाया। इसी प्रकार चौगुर्जी गांव के ग्रामीण रामसनेही, शंकर, भगवती सहित करीब एक दर्जन घरों में बाढ़ का पानी घुस गया था। अब सवाल तो यह है कि खैरटिया के लेखपाल संजय वर्मा को 'आंगन' घर क्यों नहीं नजर आता है। उन्होंने मोबाइल पर बताया कि नया पिड के किसी भी घर के अंदर बाढ़ का पानी नहीं घुसा है। अब सवाल तो यह है कि लेखपाल द्वारा तहसील प्रशासन को गुमराह क्यों किया जा रहा है। लेखपाल संजय वर्मा कहते हैं कि नया पिड में जानवरों की घारी व घरों के आंगन तक तो पानी पहुंचा है लेकिन, घरों के अंदर पानी नहीं घुसा। लेखपाल को कौन समझाए कि आंगन भी तो घर का ही हिस्सा है। नया पिड निवासी गुरमीत सिंह ने बताया कि मदद के लिए लेखपाल को सूचना दी गई लेकिन, लेखपाल अनदेखी कर उनका मजाक उड़ा रहा है।