कुशीनगर : भारत सरकार की नयी शिक्षा नीति न सिर्फ शिक्षा विशेषज्ञों की राय, विदेशों में हो रहे शिक्षा पर शोध और देश के प्रबुद्धजनों के दिए गए सुझावों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, बल्कि इसमें देश की संस्कृति और स्थानीयता का भी ख्याल रखा गया है। देश दशकों से इस प्रकार की शिक्षा नीति की आवश्यकता महसूस कर रहा था।

यह बातें बुद्ध पीजी कालेज कुशीनगर के हिदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गौरव तिवारी ने कही। वे पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। कहा कि प्राथमिक शिक्षा को मातृभाषा में करने पर जोर इस नीति की सबसे बड़ी विशेषता है। कक्षा पांच तक अंग्रेजी और हिदी को विषय के रूप में पढ़ाना सही निर्णय है। मेडिकल और कानून की पढ़ाई के अतिरिक्त शेष स्नातक पाठ्यक्रमों में एक वर्ष बाद पढ़ाई छोड़ने पर प्रमाण पत्र, दो वर्ष पर डिप्लोमा तीन पर उपाधि और शोध क्षेत्र में जाने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए चार वर्ष पर उपाधि का निर्णय बहुत ही रचनात्मक है। हाईस्कूल में बोर्ड हटाने का निर्णय भी उचित है। यह शिक्षा नीति आज की शिक्षा संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप लग रही है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए।

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