कुशीनगर : अचानक मौसम का मिजाज बदलने से लोगों को तेज धूप व उमस भरी गर्मी से राहत मिली है, लेकिन किसानों के माथे पर चिता की लकीरें दिखाई दे रही है। रविवार दोपहर 12 से आसमान में काले बादल छा गए। इसके बाद तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। शहर व ग्रामीण क्षेत्र में कई घंटे बिजली गुल रही। तेज आंधी व झमाझम बारिश धान व गन्ना की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। बारिश के कारण धान की फसल गिरने से उसके सड़ने की संभावना बढ़ गई है। इससे किसान मायूस हैं।

बीरवट कोन्हवलिया, पिपराघाट, अहिरौलीदान, मिश्रौली आदि क्षेत्र में कई एकड़ धान की फसल गिर गई है। किसान बच्चा सिंह व जेके सिंह ने बताया कि हवा व बारिश से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। धान की पकी फसल गिरने से खराब हो गई। वहीं गन्ने की फसल गिरने से पैदावार पर असर पड़ेगा। पुजारी सिंह, सुभाष सिंह, महंथ ठाकुर का कहना है कि धान काटकर खेत में छोड़ दिया था। बारिश के कारण फसल भीग गई।

कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया की मौसम विज्ञानी डा. श्रुति वी सिंह ने बताया कि मानसून की विदाई के बाद भी वर्षा का दौर अभी थमा नहीं है। मौसम विज्ञान विभाग ने 19 अक्टूबर तक बारिश का अनुमान है। वर्षा होने से धान व अन्य फसलों पर भी प्रभाव पड़ेगा। फसलों के खराब होने, गिरने से बचाने के लिए किसान सतर्क रहें। फसलों को सुरक्षित रखने का प्रबंध कर लें।

4.16 एमएम हुई औसत बारिश

पडरौना: आपदा विशेषज्ञ रवि राय ने बताया कि रविवार की सुबह आठ बजे से सोमवार की सुबह आठ बजे अर्थात 24 घंटे में औसत बारिश 4.16 एमएम (मिलीमीटर) जनपद में हुई है। जिला कृषि अधिकारी प्यारेलाल ने बताया कि पहले से जलभराव वाले स्थानों पर धान व गन्ने की फसलें बर्बाद हो रही हैं। इस पानी से पहले से कटी हुई धान की फसल के नुकसान होने की संभावना अधिक है। बताया कि अभी तहसील स्तर पर कृषि विभाग के कर्मचारियों से फसलों की क्षति का आकलन कराया जा रहा है।

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