कुशीनगर: न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक वीके जायसवाल की अदालत ने हत्या के मामले में सास-ससुर को दोषी ठहराते हुए सश्रम आजीवन कारावास तथा सात-सात हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा न करने पर अभियुक्तों को छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

न्यायालय में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता केके पांडेय का कथन था कि वादी मुकदमा सिगारी निवासी घोघरा थाना अहिरौली बाजार ने 13 जून 2016 को सूचना दी कि उसकी पुत्री लालमती की शादी थाने के ही गांव कुसम्हा टोला बेलहिया निवासी जयप्रकाश सिंह संग वर्ष 2003 में हुई थी। जयप्रकाश सिंह की पहली पत्नी की मौत काफी पहले हो चुकी थी, उससे दो बच्चे हैं। खेत व मकान में हिस्से को लेकर ससुर रामकृप सिंह व सास सुनैना अक्सर लालमती का उत्पीड़न करने लगे। इसे लेकर कई बार बातचीत हुई पर उन लोगों के व्यवहार में बदलाव नहीं आया। 11 जून को ससुराल वालों ने उसकी हत्या कर दी। गांव के लोगों ने इसकी सूचना दी तो मां स्वजन संग बेटी के घर पहुंची। वहां घर में ताला बंद मिला। पुलिस को इसकी सूचना दी। रात में घर का दरवाजा तोड़ पुलिस जब अंदर गई तो अनाज रखे कमरे में उसका शव मिला। शव को कब्जे में ले पुलिस जांच पड़ताल में जुट गई। तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपित सास-ससुर के विरुद्ध हत्या सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करने के बाद विवेचना आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया। पत्रावलियों के अवलोकन, पेश सबूत तथा दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद विद्वान न्यायाधीश ने यह सजा सुनाई।

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