कुशीनगर में कैनसेट प्रतियोगिता: 20 कैनसेट ने छुआ सफलता का आसमान; मिनी रॉकेट ने 500 मीटर तक भरी उड़ान
कुशीनगर में नारायणी तट पर इन-स्पेस, इसरो और श्रीनारायणी साइंस डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा आयोजित रॉकेट्री प्रतियोगिता में 17 राज्यों के छात्रों ने भाग लिया।

जंगली पट्टी में मिनी राकेट लांच होते ही उत्साहित प्रतिभागी। जागरण
अजय कुमार शुक्ल, कुशीनगर। नारायणी के जिस तट के किनारे बाढ़ त्रासदी के निशान थे, वहां रविवार को नवाचार, अनुसंधान संग अंतरिक्ष के विज्ञान की प्रयोगशाला उतरी। प्रक्षेपण धाम पर राकेट्री प्रतियोगिता में जुटी देश के भविष्य की अंतरिक्ष विज्ञान की प्रतिभाओं ने इन स्पेस के निदेशक बिनोद कुमार की देखरेख में सटीक गणना, सधी उड़ान के साथ सपनों के मुकाम को छुआ।
इन स्पेस के चेयरमैन पवन गोयनका की अगुआई में जुटी वरिष्ठ अंतरिक्ष विज्ञानियों की टीम ने जैसे ही थ्री..टू..वन संग गिनती पूरी की, एसेंट (राकेट-कैनसेट क्षेपण) व डिसेंट (उनका आसमान से नीचे उतरना) के बीच के समय ने रोमांच भरा तो पेलोड से सफल डाटा रिकवरी के बाद प्रतिभागी झूम उठे।
देश का नाम ऊंचा करने का आशीष
इस दौरान सुबह 9.57 से दोपहर दो बजे तक 20 कैनसेट ने एक किलोमीटर तक उड़ान भरने के साथ ही सफलता का आसमान छू लिया। एक मिनी राकेट केवल 500 मीटर ही उड़ सका। इसका गवाह बनी नारायणी भी मानो खुशी से झूमते एक दूसरे को बधाई देते प्रतिभागियों को भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान में देश का नाम ऊंचा करने का आशीष दे रही हो।
इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड आथराइजेशन सेंटर ने इसरो और श्रीनारायणी साइंस डेवलपमेंट फाउंडेशन के साथ मिलकर इन स्पेस मॉडल राकेट्री और कैनसेट इंडिया स्टूडेंट प्रतियोगिता 2026 में 17 राज्यों की 76 टीमों में शामिल अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट्स को मॉडल राकेट और मिनिएचर सैटेलाइट सिस्टम के डिजाइन, डेवलपमेंट और टेस्टिंग के जरिये असल दुनिया की इंजीनियरिंग चुनौतियों के लिए मिले प्लेटफार्म पर अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रक्षेपण धाम यानी कि नारायणी के तट पर बने कार्यक्रम स्थल पर सुबह प्रतिभागी पहुंच गए।
डाटा भेजता रहा टेलीमेट्री सिस्टम
सुबह जैसे ही पहला कैनसेट उड़ा सबकी आंखें उसके साथ हो लीं, वे आंखें भी शामिल रहीं जो भविष्य का सपना साकार करने पहुंची थीं। इसके साथ ही कंट्रोल रूम में वरिष्ठ विज्ञानियों की टीम तक हर उड़ान के साथ टेलीमेट्री सिस्टम ऊंचाई, तापमान, दबाव, मौसम, वेग आदि का डाटा भेजता रहा।
इस दौरान कब ड्रोन से कैनसेट छूटा और उससे निकले पेलोड ने किस कोण पर काम शुरू किया, सब कुछ स्क्रीन पर दिखता रहा। जिस पर 76 टीमों के देश भर से आए 560 अन्वेषी विद्यार्थियों की निगाहें टिकी रहीं।
सफलता के बाद तुरंत ही विश्लेषण का कार्य शुरू हुआ जिसकी सटीकता को एआई ने आसान बना दिया। सूर्य के छिपने के साथ विराम लिया आयोजन कल यानी कि सोमवार के लिए तैयार होने लगा। इस दौरान सांसद देवरिया शशांक मणि त्रिपाठी पूरे आयोजन पर नजर बनाए रहे।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।