जासं, कौशांबी : पुलिस भर्ती 2015 में नौकरी करने का सपना देखने वाले अभ्यर्थियों ने पांच से सात लाख रुपये देकर मध्य प्रदेश शिक्षा बोर्ड की मार्कशीट बनवाई थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद कई जालसाजों ने यह हकीकत बताई। इतना ही नहीं, एक अभ्यर्थी ने मार्कशीट बनवाने वाले माफिया का नाम तक बता दिया है। अब पुलिस माफिया की घेराबंदी की करने में जुट गई है।

वर्ष 2015 में बड़े पैमाने पर यूपी पुलिस में सिपाहियों की भर्ती हुई थी। मेरिट के आधार पर हो रही भर्ती में जिन अभ्यर्थियों का प्रतिशत कम था, उनके लिए भर्ती होना मुश्किल था। इस बीच ऐसे अभ्यर्थियों की मुलाकात फर्जी मार्कशीट बनाने वाले माफिया से हुई। माफिया ने उन्हें मध्य प्रदेश शिक्षा बोर्ड से बढ़े प्रतिशत की मार्कशीट बनवाने का लालच दिया और इसके बदले में पांच से सात लाख रुपये अभ्यर्थियों से ऐंठ लिए। मार्कशीट मिलने के बाद जालसाजी से ऐसे अभ्यर्थी भर्ती में शामिल हो गए।

कुल 251 का हुआ था चयन

दो साल तक चली भर्ती प्रक्रिया में कौशांबी जिले के 251 युवकों का चयन हुआ था। बोर्ड ने इन सभी का मेडिकल परीक्षण कराया और चरित्र प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए सूची जिले के आला अधिकारियों को भेज दी थी। जबकि भर्ती बोर्ड ने सभी का शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन शुरू कर दिया। इस बीच सुल्तानपुर के लम्भुआ निवासी अजीत कुमार पांडेय ने बोर्ड से शिकायत कर कौशांबी जिले के दर्जनों अभ्यर्थियों पर फर्जी मार्कशीट लगाए जाने का आरोप लगाया। इसे गंभीरता से लेते हुए बोर्ड के अफसरों ने जांच शुरू की तो कुल 37 अभ्यर्थियों के अभिलेख संदिग्ध पाए गए। इनमें 32 युवाओं की मार्कशीट जांच में फर्जी पाई गई। जबकि शेष की जांच जारी है। इस पर भर्ती बोर्ड ने एसपी को पत्र भेज सभी जालसाज युवाओं की सूची भी भेजी। एसपी प्रदीप गुप्ता के निर्देश पर 32 युवाओं के खिलाफ मंझनपुर कोतवाली में केस दर्ज कराया गया। पूछताछ में सामने आया माफिया का नाम

मामले की जांच कर रही पुलिस टीम ने बुधवार को कई आरोपितों से मिलकर पूछताछ भी की। केस दर्ज होने के बाद दहशत में आए कुछ युवकों ने मार्कशीट बनवाने वाले माफिया का नाम पुलिस को बता दिया। इतना ही नहीं, युवकों से यह भी बताया कि पांच से सात लाख रुपये देकर उन्होंने फर्जी मार्कशीट खरीदी है। पुलिस ने अब माफिया की धर-पकड़ की तैयारी शुरू कर दी है। माफिया ने खुद को घर में किया है कैद

केस दर्ज होने के बाद माफिया ने खुद को घर में कैद कर लिया है। वह चोरी-छिपे सुबह-शाम घर से बाहर निकलता और अपनी गाड़ी से कहीं चला जाता है। देर रात घर लौटता है। क्योंकि माफिया ने इन अभ्यर्थियों से ही नहीं बल्कि फर्जी मार्कशीट बनवाने के लिए अन्य कई लोगों से भी लाखों रुपये ले रखे हैं। अब रुपये देने वाले अन्य लोगों ने घर पर दस्तक देना शुरू कर दिया है।

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