कौशांबी की गायत्री और अंजू ने मिलकर लिखी सफलता की नई इबारत, महिलाओं के हुनर को मिलेगी उड़ान
कौशांबी के सिराथू ब्लॉक में प्रेरणा उन्नति एग्रो प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित हो रहा है, जिससे स्वयं सहायता समूह की महिलाएं दाल और मसाले बनाकर आत्मनिर्भर बनेंगी।

समूह सखी गायत्री देवी और अंजू देवी
HighLights
सिराथू में प्रेरणा उन्नति एग्रो प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित।
स्वयं सहायता समूह की 150 महिलाएं होंगी आत्मनिर्भर।
दाल, मसाले बनाकर गांव से शहर तक बेचेंगी उत्पाद।
जागरण संवाददाता, कौशांबी। अब समूह की महिलाएं सिर्फ घर की जिम्मेदारियां ही नहीं, बल्कि अपने हुनर और मेहनत से रोजगार की नई इबारत लिख रही हैं, जिसकी मिसाल समूह सखी गायत्री देवी और अंजू देवी हैं।
दरअसल, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की पहल पर सिराथू ब्लाक परिसर में स्थापित प्रेरणा उन्नति एग्रो प्रोसेसिंग सेंटर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नया अवसर लेकर आया है। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं दाल और मसालों समेत विभिन्न उत्पाद तैयार करेंगी, जिनकी पहुंच गांव से लेकर शहर के बाजारों तक होगी।
ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ेंगी
इस पहल का मकसद ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना है। सेंटर में उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन से जुड़ी गतिविधियों के जरिए महिलाओं को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

इससे न केवल उनके कौशल में निखार आएगा, बल्कि स्वरोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे। समूह की महिलाओं द्वारा तैयार दाल और मसालों को स्थानीय बाजारों के अलावा जिले और ब्लाकों में संचालित प्रेरणा कैंटीनों तक पहुंचाया जाएगा।
आर्थिक तरक्की में भी अहम भागीदारी
महिलाएं अपनी कमाई से परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च भी उठा सकेंगी। अब महिलाएं केवल परिवार की जिम्मेदारियां निभाने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि अपने परिश्रम से परिवार की आर्थिक तरक्की में भी अहम भागीदारी निभाएंगी।
उपायुक्त एनआरएलएम ऊषा पाल ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। सिराथू ब्लाक परिसर में एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट बनकर तैयार है, जिसका जल्द शुभारंभ किया जाएगा। यूनिट में कामकाज के लिए स्वयं सहायता समूह की 150 महिलाओं का चयन किया गया है।
दाल से मसालों तक तैयार होंगे शुद्ध उत्पाद
इस सेंटर में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अरहर, चना और मटर की दाल के साथ बेसन तैयार करेंगी। इसके अलावा हल्दी, धनिया, मिर्च और गरम मसाला पाउडर का उत्पादन भी होगा। इन उत्पादों को बाजार में बेचकर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी।
पहले हुनर होने के बावजूद ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और अपनी प्रतिभा निखारने के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते थे। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद उनकी राह आसान हुई है। अब महिलाएं एक-दूसरे के अनुभवों से सीखकर सामूहिक प्रयासों के जरिए स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।
-अंजू देवी, समूह सखी
समूह की महिलाओं का मानना है कि उनके उत्पादों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिले तो कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। स्वयं सहायता समूह उनके लिए महज रोजगार का जरिया नहीं, बल्कि एकजुटता, आत्मविश्वास और आर्थिक मजबूती का आधार भी बन रहे हैं।
-गायत्री देवी, समूह सखी
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