हरदोई की बिट्टा रानी और मालती देवी ने बदली किस्मत, स्वयं सहायता समूह के जरिए बनीं आत्मनिर्भर
हरदोई की बिट्टा रानी और मालती देवी ने स्वयं सहायता समूहों और एचसीएल फाउंडेशन के सहयोग से आत्मनिर्भरता की मिसाल ...और पढ़ें
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HighLights
बिट्टा रानी ने पढ़ाई पूरी कर ट्रैक्टर खरीदा, दुग्ध केंद्र चलाया।
मालती देवी ने कृषि यंत्र व्यवसाय, सौर ऊर्जा आटा चक्की स्थापित की।
दोनों ने 801 किसानों को सेवाएँ दीं, ₹7.13 लाख कमाए।
जागरण संवाददाता, हरदोई। कभी घर की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करने वाली ग्रामीण महिलाएं आज अपनी मेहनत और हौसले से सफलता की नई इबारत लिख रही हैं। सीमित संसाधन और आर्थिक तंगी भी उनके कदम नहीं रोक सकी। कोथावां की बिट्टा रानी ने आठवीं के बाद छूटी पढ़ाई दोबारा शुरू कर इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया और अब खुद के ट्रैक्टर की मालिक हैं। वहीं, अहिरोरी की मालती देवी ने खेती पर निर्भर परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने के लिए कृषि यंत्रों का व्यवसाय शुरू किया और सौर ऊर्जा से संचालित आटा चक्की स्थापित कर ली।
दोनों ने स्वयं सहायता समूह और एचसीएल फाउंडेशन के सहयोग से न केवल आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी, बल्कि 801 छोटे किसानों को कृषि सेवाएं उपलब्ध कराईं। इनके समूहों के कस्टम हायरिंग सेंटरों से अब तक 7.13 लाख रुपये से अधिक की आय हुई है। दोनों की सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। कोथावां विकासखंड की ग्राम पंचायत सिकंदरपुर निवासी बिट्टा रानी ममता महिला स्वयं सहायता समूह की कोषाध्यक्ष हैं।
वर्ष 2012 में समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बच्चों के साथ दोबारा पढ़ाई शुरू की और हाईस्कूल व इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया। दिसंबर 2023 में एचसीएल फाउंडेशन के सहयोग से कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित हुआ। इसके माध्यम से अब तक 315 किसानों को 999 कच्चा बीघा भूमि पर कृषि सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। समूह ने 2.94 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की। सफलता से उत्साहित बिट्टा ने अपना ट्रैक्टर खरीद लिया। अब वह जीवन आनंद दुग्ध संग्रहण केंद्र भी संचालित करती हैं, जहां प्रतिदिन करीब 100 लीटर दूध एकत्र होता है।
अहिरोरी विकासखंड के विक्टोरियागंज की मालती देवी ने आर्थिक तंगी से निकलने के लिए स्वरोजगार की राह चुनी। सितंबर 2021 में सुनैना महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। जुलाई 2022 में एचसीएल फाउंडेशन के सहयोग से कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू किया। प्रशिक्षण लेकर कृषि यंत्र किराए पर देने लगीं। अब तक 486 किसानों को 1200 कच्चा बीघा भूमि पर सेवाएं देकर 4,19,645 रुपये की आय अर्जित की।
इसके बाद सौर ऊर्जा संचालित आटा चक्की स्थापित की। कृषि उद्यमिता में उपलब्धियों के लिए मुख्यमंत्री की उपस्थिति में उन्हें 75 हजार रुपये का पुरस्कार भी मिला। मालती का कहना है कि मेहनत और सही अवसर मिलने से महिलाएं परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं।
