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कौशांबी में EDFC ट्रैक के नीचे बही 4 किमी मिट्टी , रेलवे ने शुरू की आपातकालीन मरम्मत

Published: Wed, 16 Sep 2026 05:59 AM (IST)

कौशांबी में लगातार बारिश के कारण ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) ट्रैक के नीचे लगभग चार किलोमीटर तक मिट्टी बह ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. कौशांबी में EDFC ट्रैक के नीचे 4 किमी मिट्टी बही।

  2. बारिश से पटरी धंसने का गंभीर जोखिम खड़ा हो गया है।

  3. रेलवे ने आपातकालीन मरम्मत और निगरानी शुरू की।


जागरण संवाददाता, कौशांबी। लगातार हो रही बारिश के चलते ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर (ईडीएफसी) के ट्रैक पर खतरे की घंटी बज गई है। कानपुर-प्रयागराज रेल खंड पर सिराथू के समीप रेलवे लाइन के दोनों किनारों से लगभग चार किलोमीटर तक मिट्टी बह गई है।

तकनीकी रूप से जिस ऊंचे मिट्टी के चबूतरे या तटबंध पर रेलवे ट्रैक टिका होता है, उसे एंबेंकमेंट ’ कहते हैं। पानी के तेज बहाव से यह एंबेंकमेंट जगह-जगह कट गया है, जिससे पटरी के नीचे की जमीन कमजोर होने और ट्रैक धंसने का गंभीर जोखिम खड़ा हो गया है। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर मुख्य रूप से पंजाब के साहनेवाल (लुधियाना) से शुरू होकर हरियाणा, उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार के सोननगर व आगे पश्चिम बंगाल के दानकुनी तक जाता है।

यह विशेष कारिडोर मालगाड़ियों के तेज और निर्बाध संचालन के लिए बनाया गया है। इस व्यस्त रूट पर चौबीसों घंटे कोयला, खाद्यान्न और कंटेनर ढोने वाली 80 से 100 से अधिक मालगाड़ियां फर्राटा भरती हैं। सिराथू से लेकर सयारा रेलवे ओवर ब्रिज तक यानी लगभग चार किलोमीटर तक बीच-बीच में मिट्टी का कटान हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बारिश जारी रही और एंबेंकमेंट का कटाव बढ़ा, तो बड़ा हादसा हो सकता है।

खतरे को देखते हुए ईडीएफसी प्रशासन ने संवेदनशील हिस्सों में रेत व मिट्टी से भरी बोरियां लगवाकर पानी का बहाव रोकने का प्रयास किया है। ईडीएफसी परियोजना के उप प्रबंधक अरविंद पांडेय ने बताया कि संवेदनशील स्थानों पर बोरियां लगाकर कटाव नियंत्रित कर लिया गया है। मानसून समाप्त होते ही टेंडर धारक फर्म के जरिए मिट्टी का भराव करवाकर स्थायी मरम्मत कार्य पूरा कराया जाएगा।

कंट्रोल कमांड सेंटर से रखी जा रही निगरानी ईडीएफसी पर चल रही मालगाड़ियों की सीधी निगरानी सूबेदारगंज स्थिति एशिया के सबसे बड़े कंट्रोल कमांड सेंटर से की जा रही है। यहां 110 मीटर की वाल पर 90 मीटर की स्क्रीन से मालगाड़ियों की लाइव निगरानी हो रही है। कौन सी मालगाड़ी कहां है, इसकी एक एक पल की अपडेट स्क्रीन पर हो रही है।

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