गंगा और उसकी सहायक नदियां होंगी प्रदूषण मुक्त, तैयार किया जाएगा मास्टर रोडमैप
कौशांबी प्रशासन ने गंगा और उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने, संरक्षण एवं कायाकल्प के लिए कदम उठाए हैं।

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HighLights
नदियों में प्रदूषित पदार्थ डालने पर पूर्ण प्रतिबंध।
प्रदूषण स्रोतों की पहचान कर ठोस कार्ययोजना बनेगी।
तटीय निर्माण को राष्ट्रीय गंगा मिशन से अनुमोदन अनिवार्य।
जागरण संवाददाता कौशांबी। गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने, संरक्षण एवं कायाकल्प की दिशा में प्रशासन ने कदम तेज कर दिए हैं। नदियों में किसी भी प्रकार का प्रदूषित पदार्थ डालने पर रोक सुनिश्चित की जाएगी।
नदियों में सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट अथवा किसी भी प्रकार का प्रदूषित पदार्थ डालने पर रोक को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। इसके लिए प्रदूषण के संभावित स्रोतों को चिह्नित कर उनके नियंत्रण की ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
गंगा और उसकी सहायक नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि पर्यावरण और जनजीवन की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे प्रदूषण के संभावित स्रोतों को चिह्नित कर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाया जाएगा।
नदियों में सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और अन्य प्रदूषित पदार्थों को डालना पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा। तटीय क्षेत्र में किसी भी प्रकार के आवासीय अथवा औद्योगिक निर्माण से पहले राष्ट्रीय गंगा मिशन से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करना होगा। संबंधित विभागों को अपने-अपने स्तर से निगरानी व्यवस्था मजबूत व नदी की स्वच्छता और पर्यावरणीय सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
जिलाधिकारी डॉ. अमित पाल ने संबंधित विभागाध्यक्षों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए प्रभावी कार्ययोजना (रोडमैप) तैयार करने का आदेश जारी किया है। विभागों को अपने-अपने स्तर से जिम्मेदारी तय कर निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश दिया है।
इन विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारी
गंगा और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण को लेकर एडीएम वित्त एवं राजस्व के साथ जिला पंचायत राज अधिकारी, परियोजना प्रबंधक सेतु निगम, जिला पंचायत, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, लघु सिंचाई विभाग, जल निगम, मनरेगा, नगर पालिका परिषद एवं पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संबंधित विभाग अपने-अपने क्षेत्र में नदी प्रदूषण के संभावित स्रोतों की निगरानी करेंगे। तटीय क्षेत्रों में होने वाले निर्माण और विकास कार्यों पर भी नजर रखी जाएगी।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुल व तट का होगा निर्माण
गंगा नदी व उसकी सहायक नदियों के संरक्षण और सुचारु प्रवाह के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। नदी में जल भंडारण के लिए आवश्यकतानुसार डायवर्जन की व्यवस्था की जाएगी। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन सुगम बनाने के लिए पुल, सहायक सड़क और संपर्क मार्गों का निर्माण कराया जाएगा।
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नदी के तटों को सुरक्षित रखने के लिए तटबंध व अन्य जरूरी संरचनात्मक कार्य भी किए जाएंगे। इन कार्यों में नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पर्यावरणीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाएगा। संबंधित विभागों को प्रस्ताव तैयार कर नियमानुसार अनुमोदन के बाद कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं।
गंगा और उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। नदी में किसी भी प्रकार का प्रदूषित पदार्थ न पहुंचे, इसके लिए संबंधित विभाग प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करेंगे। तटीय क्षेत्रों में होने वाले निर्माण कार्यों में निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्ययोजना तैयार कर नदी संरक्षण और पर्यावरणीय सुरक्षा को प्रभावी रूप से सुनिश्चित कराएंगे।
डॉ. अमित पाल, डीएम
