कौशांबी : प्रदेश सरकार प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों में बेहतर शिक्षा के लिए हर महीने करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। लेकिन इसका लाभ इस स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। जहां पर शिक्षकों की जरूरत वहां तैनात नहीं किया गया है। जबकि शिक्षकों की सुविधा को देखते हुए उन्हें कम बच्चों वाले हाईवे किनारे के स्कूलों में तैनात किया है। चर्चा यह भी है कि शिक्षकों को यह सुविधा देने के लिए सुविधा शुल्क लिया जा रहा है।

हाईवे किनारे स्थित मूरतगंज ब्लॉक के चंदवारी गांव में प्राइमरी स्कूल है। यहां पर 58 बच्चे पढ़ते हैं और उनको पढ़ाने के लिए पांच शिक्षकों की तैनात हैं। इतने शिक्षक वहां पर करीब दो साल से हैं। चंदवारी में पांच शिक्षक हैं तो यहां पर 150 या इससे अधिक बच्चे होने चाहिए। चंदवारी स्कूल में कम बच्चे और अधिक शिक्षक होने के बावजूद शिक्षकों को यहां से नहीं हटाया गया है। इन पांच शिक्षकों के वेतन पर प्रदेश सरकार हर महीने करीब दो लाख रुपये खर्च कर रही है। बेसिक शिक्षा विभाग चंदवारी प्राइमरी स्कूल के 58 बच्चों पर हर साल 24 लाख रुपये से अधिक खर्च कर रही है लेकिन यहां की शैक्षणिक गुणवत्ता वाले छोटे स्कूल से भी बदतर है। ऐसे ही काशिया पूरब के जूनियर हाईस्कूल में 120 बच्चों को पढ़ाने के लिए छह शिक्षक हैं। मानक के अनुसार यहां भी शिक्षक अधिक हैं। ऐसा केवल एक स्कूल नहीं जिले के कई स्कूलों में है। इसके बावजूद इन शिक्षकों को दूसरे स्कूल नहीं भेजा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर इसी जिले में यमुना किनारे के स्कूलों में तीन से चार सौ बच्चे हैं लेकिन वहां पर दो-तीन शिक्षक से काम चलाया जा रहा है।

बीएसए बोले

- कई स्कूलों में असमानता है। हाईवे किनारे के स्कूलों में शिक्षक मानक से ज्यादा है। इस सत्र में समायोजन नहीं हो पाया है इसलिए जिन विद्यालयों में मानक से अधिक शिक्षक हैं, लेकिन अब इनको दूर दराज के स्कूलों में भेजा जाएगा।

- महाराज स्वामी, बीएसए।

Posted By: Jagran