कसगंज, संवाद सहयोगी : उत्तर भारत की प्रसिद्ध तीर्थ नगरी सोरों की हरिपदी गंगा की प्यास बुझाने को सिचाई विभाग के विशेष अनुरोध पर पानी तो मिला, लेकिन गोरहा नहर से यह पानी हरिपदी कुंड तक नहीं पहुंचा। सिचाई विभाग का दावा है कि पानी छोड़ दिया गया है, लेकिन हरिपदी तक पानी न पहुंचने के पीछे माना जा रहा है कि रास्ते में किसानों ने पानी बिखेर दिया है।

हरिपदी गंगा का जलस्तर कम हो जाने के कारण दूषित हो रहा है। इससे पिछले दिनों हजारों मछलियां भी यहां मर चुकी हैं। पुरोहितों के आक्रोश को देखते हुए नगर पालिका ने सिचाई विभाग से पानी का अनुरोध किया। सिचाई विभाग ने नरौरा के अफसरों से संपर्क किया तो पता चला कि पहाड़ों से ही पानी कम आ रहा है। सिचाई विभाग ने दो दिन के लिए गोरहा नहर में पानी छोड़े जाने का विशेष अनुरोध किया। ताकि हरिपदी गंगा को पानी मिल जाए। सिचाई विभाग के अनुरोध पर नरौरा बैराज से दो दिन के लिए नहर में पानी छोड़ गया। मंगलवार को नहर लबालब थी। हरिपदी गंगा की ओर जाने वाली नहर में पानी था, लेकिन यह पानी हरिपदी गंगा तक नहीं पहुंच पाया। इससे पहले ही यह पानी इधर-उधर खेतों में बिखर गया है। हालांकि, माना जा रहा है कि बुधवार तक पानी हरिपदी गंगा में पहुंच सकता है। यदि पानी बुधवार तक नहीं पहुंचा तो फिर पानी की समस्या होगी। क्योंकि, नहर एक सप्ताह के लिए बुधवार से फिर बंद हो जाएगी। गोमुख से पानी की सिर्फ औपचारिकता

पुरोहितों की मांग पर नगर पालिका ने गोमुख से हरिपदी गंगा को पानी देने दावा किया, लेकिन यह सिर्फ औपचारिकता दिखाई दी है। क्योंकि, गोमुखों से पालिका ने अभी तक हरिपदी गंगा को पानी देना शुरू नहीं किया है। वायदे हवाहवाई साबित हुए हैं। हरिपदी गंगा में जल्द ही पानी छोड़ा जाना चाहिए। जिससे आस्था आहत न हो और जल आचमन योग्य बना रहे।

- अमर शास्त्री, तीर्थ पुरोहित तीर्थ नगरी सोरों आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां तीर्थ नगरी का जल सदैव शुद्ध रहना चाहिए। यहां दूरदराज से श्रद्धालु आते हैं।

- राजीव तिवारी, तीर्थ पुरोहित गोरहा नहर में नरौरा बैराज से विशेष अनुरोध पर पानी छोड़ गया है। नहर में पर्याप्त पानी है और यह पानी हरिपदी गंगा के लिए सोमवार देर रात को ही छोड़ जा चुका है। बुधवार से नहर फिर बंद हो जाएगी।

- अरुण कुमार, अधिशासी अभियंता सिचाई

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