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'लाश कहीं भी फेंक दो, हमसे मतलब नहीं'... वृद्धाश्रम में मां की मौत के बाद भी नहीं आईं बेटियां; दूसरों ने किया अंतिम संस्कार

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Sun, 18 Oct 2026 06:30 AM (IST)

पिता की मृत्यु के बाद संपत्ति बेचकर बेटियों ने मां को घर से निकाल दिया, जिसके बाद वह सात साल ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. बेटियों ने संपत्ति बेचकर मां को घर से निकाल दिया।

  2. सात साल वृद्धाश्रम में रहीं, बेटियों का इंतजार करतीं।

  3. मां की मौत पर भी बेटियों ने आने से इनकार किया।

जागरण संवाददाता, कासगंज। पिता की मौत के बाद संपत्ति बेचकर पैसा तीनों बेटियों ने बराबर बांट लिया। इसके बाद मां को घर से निकाल दिया। सात सालों से वृद्धाश्रम में रह रही मां आखिरी समय में बेटियों से मिलने को तड़पती रही, मगर बेटियां नहीं आईं। शुक्रवार रात मां ने दम तोड़ दिया। आश्रम प्रबंधन ने दामाद को फोन किया तो आने से साफ इनकार कर दिया।

अपनों के मुंह मोड़ने के बाद समाजसेवी संस्था मानव सेवा समिति ने वृद्धा का अंतिम संस्कार कर दिया। नरोत्तम राजपूत और शांति देवी ने तीनों बेटियों को नाज-नखरों से पाला। पढ़ा-लिखाकर तीनों की शादी कर दी। 10 वर्ष पूर्व नरोत्तम राजपूत का निधन हो गया और शांति देवी अकेली रह गईं। 2018 में मकान बेचकर रकम का बेटी व दामादों ने बंटवारा कर लिया।

कुछ दिन तो बेटियों ने अपने पास रखा और फिर घर से निकाल दिया। पुलिस ने लावारिस हालत में घूमतीं मिली शांति देवी को एटा वृद्धाश्रम भेज दिया गया। 2019 से वे कासगंज वृद्ध आश्रम में रह रहीं थी। दो माह पूर्व गिरने से उनका कूल्हा टूट गया। उनका उपचार चल रहा था। शुक्रवार रात उनका निधन हो गया।

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कहीं भी फेंक दो लाश, हमसे कोई मतलब नहीं

आश्रम प्रबंधन के अनुसार शांति देवी की एक बेटी बरेली और दूसरी कासगंज में रहती हैं। बरेली में रहने वाली बेटी का फोन स्विच आफ मिला। दूसरी बेटी के पति गोपाल को फोन पर बताया तो उनका कहना था कि कहीं भी फेंक दो लाश, हमसे कोई मतलब नहीं। हम नहीं आएंगे।