कासगंज, जागरण संवाददाता। बुधवार रात को गंगा का जलस्तर बढ़ने से गांवों के इर्द-गिर्द हिलोरे भर रहा पानी भी तेजी से बढ़ने लगा। सुन्नगढ़ी क्षेत्र में कई जगह पर लगे बंबे ऐसे में ग्रामीणों के मददगार बने, जिनसे होकर पानी दौड़ता नजर आया। गांवों में पानी भर जाने से कई लोगों के समक्ष समस्या खड़ी हो गई है। कइयों के बाड़ों में पानी भर गया तो भूसे की बुर्जी एवं उपले भी पानी में भीग गए।

बुधवार शाम को कछला घाट पर गंगा का जलस्तर 163.73 मीटर पर था, जो रात में बढ़कर 163.8 मीटर पर पहुंच गया। गंगा का जल बढ़ने से गांवों की तरफ बढ़ रहे पानी की भी रफ्तार बढ़ गई। हालांकि पानी आबादी से दूर है, लेकिन ग्रामीणों को गंगा बड़ा दर्द दे रही है। किसौल एवं आसपास के गांवों में भूसे की बुर्जी एवं उपलों के बिटौरे पानी में समा गए। वहीं मिहोला में बंधा टूटने से दौड़े पानी से भी बड़ा नुकसान हुआ। ग्रामीणों को यहां पर अंदेशा भी नहीं था कि गांव तक पानी आएगा, रात में आए पानी से खेत में खड़े हुए उपले के बिटौरे भी इससे भीग गए, जिससे किसानों का काफी नुकसान हुआ है। किसानों को अब वर्ष भर ईधन के लिए भी भटकना पड़ेगा।

किसौल के रामदीन कहते हैं कि गांव के कई लोगों के उपले खराब हो गए हैं। वहीं मेहमूद पुर पुख्ता में भी इससे बड़ा नुकसान हुआ है। किसौल से सुन्नगढ़ी रोड पर सैकड़ों बीघा फसल भी जलमग्न हो गई है।

रात भर अफसरों को करते रहे रिपोर्ट

बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मियों को रात भर मुस्तैद रहने के आदेश दिए थे। ऐसे में रात में अधिकारियों को हर घंटे पर बाढ़ की रिपोर्टिग भी जारी रही। सुबह चार बजे तथा पांच बजे गंगा के जल स्तर की रिपोíटंग की गई।

रेलवे ने भी की ब्रिज की मरम्मत

रेल प्रशासन भी कछला पर पुल पर निगरानी कर रहा है। 2010 की घटना के बाद रेलवे कोई रिस्क नहीं लेना चाहता है। कछला घाट पर रेलवे ने भी गुरुवार को ब्रिज की मरम्मत की। हालांकि ब्रिज में कोई कमी नहीं आई थी, लेकिन कुछ जगह पर मरम्मत की जरूरत को देखते हुए रेल प्रशासन ने मरम्मत के लिए सामान मंगा लिया।

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