संवाद सहयोगी, कासगंज: गांव मीरापुर निवासी किसान की पंजाब में मौत हो गई। किसान गाजीपुर बार्डर पर धरने पर बैठा था। वहां उसकी नौ दिसंबर को हालत बिगड़ गई थी। स्वजनों ने उसे पंजाब के गांव मोगा के निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया था। वहां उसकी बुधवार देर रात मौत हुई है।

कासगंज के गांव मीरापुर में पंजाब के मोगा के कई परिवार 1980 में आकर रहने लगे थे। सभी परिवार कृषि से जुड़े हुए है। 60 वर्षीय लखवेंदर सिंह का परिवार भी उन्हीं में से एक था। उनकी बुधवार देर रात गांव मोगा के निटीसिटी हास्पिटल में मौत हो गई। लखवेंदर के पुत्र हरप्रीत का कहना है कि उसके पिता दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन में धरने पर बैठे थे। बीती नौ दिसंबर को धरना स्थल पर ही उनकी हालत बिगड़ गई। लोग उन्हें गांव मोगा ले गए। वहां निटीसिटी हास्पिटल में भर्ती कराया गया। उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और बुधवार की रात उनकी मौत हो गई है। उनका मानना है कि धरने पर कड़कड़ाती सर्दी में बैठे रहने के कारण उनकी हालत बिगड़ी थी। उनके बेटे ने बताया कि पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। वहीं अंतिम संस्कार गांव मोगा में ही हो रहा है। मृतक किसान लखवेंदर सिंह भारतीय किसान यूनियन टिकैत गांव मीरापुर के अध्यक्ष थे। उनकी मौत से पार्टी कार्यकर्ताओं में शोक है। सरकार मृतक किसान के आश्रितों को दस लाख का मुआवजा व परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे। इस संबंध में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मांग की जाएगी।

-संजय प्रजापति जिलाध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन

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