जासं, कासगंज: बाढ़ की तबाही से तराई त्राहि-त्राहि कर उठी है। पानी में डूबे आठ दर्जन गांव में संक्रामक रोग फैल गए है। घर-घर चारपाइयां बिछने लगी है तो वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें नाकाफी साबित हो रही है। तमाम गांवों में टीम पहुंच ही नहीं रही। ग्रामीण अब बीमारी से ¨चतित हो उठे है।

बैराजों से छोड़े जा रहे पानी से गंगा की लहरें इस तरह मचल उठी है कि तराई में पूरी तरह तबाही होने लगी है। अब तो फसलें बर्बाद लेकिन अब तो जनमानस रोगों से घिर गया है। सबसे अधिक रोगी त्वचा रोग के है। संक्रामक रोगों के साथ-साथ त्वचा रोग से घर-घर चारपाइयां बिछी हुई है। ग्रामीणों को स्वास्थ्य विभाग की टीमों का इंतजार है लेकिन टीमें कागजों में दौड़ती नजर आ रही है। क्योंकि नगला डंबर, पनसोती, नगला बख्ती, लहरा, पचलाना, बघेला सहित तमाम गांवों में वाष्पीकरण के कारण त्वचा रोगियों की संख्या बढ़ गई है।

बढ़ती जा रही है रौद्रता

गंगा नदी में मचलती लहरों से रौद्रता बढ़ती ही जा रही है। यहां पानी अब तेजी के साथ हर रोज कई गांव को अपने आगोश में ले रहा है। इधर बैराजों से पानी का दबाव कम नहीं हो रहा। बाढ़ को लेकर ¨सचाई विभाग भी पूरी तरह ¨चतित नजर आ रहा है।

पानी का डिस्चार्ज

हरिद्वार - 93 हजार क्यूसेक,

बिजनौर - 1.54 लाख क्यूसेक

नरौरा - 2.02 लाख क्यूसेक

कछला पुल - 163.75 मीटर गेज

बाढ़ क्षेत्र में नहीं पहुंचते लेखपाल:

गंगा नदी पार की ग्राम सभाओं में बाढ़ का प्रकोप फैला हुआ है। क्षेत्र से लेखपाल नदारत हैं। पटियाली के हिम्मतनगर बझेरा के ग्रामीणों का आरोप है कि लेखपाल ज्ञानेंद्र के न पहुचने से बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं प्रशासन तक नहीं पहुँच रही हैं।

सक्रिय है टीमें

स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय है। तराई क्षेत्रों में टीमें पहुंच रही है। जिला स्तरीय अधिकारी निरीक्षण भी कर रहे है। -- डा. नरेंद्र कुमार, सीएमओ

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