यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 09, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पूर्वजों के प्रसन्न होने से प्राप्त होती आत्मिक ऊर्जा
जागरण संवाददाता, कानपुर देहात : पितरों को प्रसन्न कर मानव सहज ही देवताओं की शरण प्राप्त

जागरण संवाददाता, कानपुर देहात : पितरों को प्रसन्न कर मानव सहज ही देवताओं की शरण प्राप्त कर मोक्ष पा सकते हैं। मंगलवार को पितृ विसर्जनी अमावस्या के मौके पर श्री हनुमान गढ़ी आश्रम कड़री में प्रवचन करते हुए आचार्य ने यह उद्गार व्यक्त किए। इस मौके पर यहां ब्रम्हभोज का भी आयोजन हुआ। वहीं पितृ पक्ष के अंतिम दिन लोगों ने श्राद्ध व तर्पण के बीच पितरों को विदाई दी गई। इसके साथ ही यमुना व सेंगुर नदियों में श्रद्धालुओं ने डुबकियां लगाई। जबकि तमाम लोग गंगा स्नान के लिए खेरेश्वर व बिठूर के लिए रवाना हुए।
पितृ विसर्जनी अमावस्या पर लोगों ने श्रद्धा व आदर के साथ श्राद्ध व पितरों को जल देने (तर्पण) के साथ ही ब्राम्हणों व कन्याओं को भोजन कराया। इस मौके पर काक बली व स्वान बली का भी भोग निकाला गया। मूसानगर कस्बे में मातृ गया के रूप में चर्चित देवयानी सरोवर में ¨पड दान के साथ यमुना तट पर पहुंचकर श्रृद्धालुओं ने पितरों को जल अर्पित किया। इसके बाद पौराणिक मुक्तेश्वरी मंदिर पहुंचकर आदि शक्ति का दर्शन कर पूजन भी किया। कमोवेश यही हाल कथरी घाट, दुर्वाषा आश्रम के नजदीक सेंगुर नदी किनारे भी रहा। जबकि तमाम श्रृद्धालुओं ने खेरेश्वर व बिठूर के ब्रम्हावर्त घाट पर पहुंचकर गंगा स्नान किया। इधर आस्था के केंद्र हनुमानगढ़ी आश्रम कड़री में भी पित्र विसर्जनी अमावस्या को ब्राम्हणों का पूजन के साथ भंडारा आयोजित कर भेज भी कराया गया। इस मौके पर आचार्य रामबाबू अवस्थी ने कहा कि पितरों को प्रसन्न किए बिना देवताओं को प्रसन्न नहीं किया जा सकता है। उन्होने कहा कि पितर ही धर्म, कर्म व महान तपस्या के प्रतीक हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जी ने भी पितरों को प्रसन्न करके लंका पर विजय प्राप्त की थी। पितर कार्य करने में मानव को आत्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। गया तीर्थ क्षेत्र में माता सीता जी के पिंडदान करने का आज भी प्रमाण मिलता है। मनु मरीच,अंगिरा ब्रम्हा आदि पितर ही तो हैं। उन्होंने बताया कि आदि जगदगुरु शंकराचार्य जी ने माता का संस्कार करके भारतीय संस्कृति मे पितरों को सम्मान किया जिससे वह आदि गुरु कहलाए। उन्होने यस्य पितरि तुष्यन्ति तुषयन्ते सर्व देवता: का भी उल्लेख करते हुए लोगों से पित्र पक्ष में पितरों को प्रसन्न करने का महत्व बताया। इस मौके पर आश्रम के सर्वराकार अखिलेश उर्फ अन्नू बाजपेई,मौजी अग्निहोत्री,शिव प्रकाश शुक्ला, मन्नीलाल वर्मा, रामू मिश्रा आदि मौजूद रहे।
