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महाकालेश्वर मंदिर, बैरी सवाई

मैथा ब्लाक के बैरी सवाई गांव में स्थित अति प्राचीन महाकालेश्वर महादेव मंदिर भक्तों की आस्था व

By JagranEdited By: Published: Mon, 13 Aug 2018 06:47 PM (IST)Updated: Mon, 13 Aug 2018 07:09 PM (IST)
महाकालेश्वर मंदिर, बैरी सवाई
महाकालेश्वर मंदिर, बैरी सवाई

मैथा ब्लाक के बैरी सवाई गांव में स्थित अति प्राचीन महाकालेश्वर महादेव मंदिर भक्तों की आस्था व आराधना का केंद्र है। श्रावण माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आकर जलाभिषेक व पूजन करते हैं। अंतिम सोमवार को विशेष पूजन व रुद्राभिषेक में भागीदारी कर मनौतियां भी मानते हैं।

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मंदिर का इतिहास-

बैरी सवाई गांव के पास करीब सौ साल पहले जंगल हुआ करता था। ¨कवदंती के अनुसार महोबा से चंदेलवंश के राजकुमार एक बार यहां शिकार खेलने आए थे। जहां बियावान जंगल में एक टीले पर शिव¨लग मिलने पर उन्होंने यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराकर इस शिव¨लग की प्राण प्रतिष्ठा कराई थी। कालेश्वर महादेव मंदिर के नाम से विख्यात इस मंदिर को करीब बीस साल पहले शोभन मंदिर के संत विरक्तानंद जी महाराज ने जीर्णोद्धार कराने के साथ ही इसे भव्य रूप प्रदान किया।अति प्राचीन विशालकाय शिव¨लग आसपास के लोगों की आस्था व आराधना का केंद्र है।

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तैयारियां

सावन माह में इस प्राचीन मंदिर में शिव आराधना का विशेष महत्व है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजन व जलाभिषेक को आते हैं। इस माह के अंतिम सोमवार व शिवरात्रि के मौके पर यहां विशेष पूजन व रुद्राभिषेक का आयोजन होता है। बड़ी संख्या में लोग भागीदारी करते हैं। इस मौके पर यहां आने वाले भक्तों के लिए पूजन सामग्री व उनके वाहनों की पार्किंग के लिए अलग से इंतजाम किए गए हैं।

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ऐसे पहुंचें मंदिर

कानपुर व इटावा से रेल रूट से आने वाले श्रद्धालु मैथा स्टेशन पर उतरने के बाद टेंपो व निजी वाहनों से बैरी सवाई आते हैं। जबकि कल्यानपुर के श्रद्धालु बाघपुर होकर व बेला विधूना के श्रद्धालु शिवली होकर बैरी सवाई आने के बाद पूजन अर्चन करते हैं। जबकि कन्नौज , बिल्हौर व शिवराजपुर के श्रद्धालु शिवली से बैरी सवाई आते हैं।

बैरी स्थित इस प्राचीन महाकालेश्वर मंदिर में सुख व समृद्धि दायक षडाक्षर मंत्र ऊं नम: शिवाय का सावन के प्रत्येक सोमवार को जप होता है। जबकि अंतिम सोमवार को होने वाले विषेष पूजन व रुद्राभिषेक में भाग लेने वालों की सभी मनोकामनाए पूरी होने की मान्यता है। फलस्वरूप अंतिम सोमवार को होने वाले विशेष पूजन में भक्त शामिल होकर मनौतियां मानते हैं। मनौती पूरी होने पर पूजन व घंटे आदि भी चढ़ाते हैं।

- पं.विनोद कुमार मिश्रा, पुजारी- महाकालेश्वर मंदिर बैरी सवाई ।


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