कानपुर देहात 400 करोड़ पावर प्लांट घोटाला: कंपनियों पर कार्रवाई, शासन के अफसरों को अभयदान क्यों?
चपरघटा में पावर प्लांट के नाम पर 400 करोड़ रुपये के घोटाले में कंपनियों पर कार्रवाई हुई है, लेकिन संबंधित ...और पढ़ें

चपरघटा की जमीन जहां लगना था प्लांट। जागरण
HighLights
चपरघटा पावर प्लांट घोटाले में कंपनियों पर कार्रवाई, अफसर बचे
944 हेक्टेयर जमीन गिरवी रखकर 400 करोड़ रुपये का घोटाला
जिम्मेदार सरकारी अफसरों की लापरवाही पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं
जागरण संवाददाता, कानपुर देहात। पावर प्लांट लगाने के नाम पर 15 साल पहले 944 हेक्टेयर जमीन को हरियाणा के गुरुग्राम स्थित पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, मुंबई स्थित आइडीबीआइ बैंक शाखा में गिरवी रख 1500 करोड़ का ऋण लेकर 400 करोड़ रुपये हड़पने के मामले में आरोपित कंपनियों के अफसरों पर कार्रवाई तो की गई, लेकिन राज्य प्रशासन के संबंधित अफसरों को अभी तक अभयदान मिला हुआ है। अनुबंध की शर्त के तहत तीन साल में प्लांट लगाना था, लेकिन एक ईंट तक नहीं रखी गई और दोनों कंपनियां खेल करते हुए 2014 में खुद को दिवालिया घोषित कर भाग गईं।
इस दौरान निगरानी का जिम्मा संभाले तत्कालीन एडीएम भूमि-अध्याप्ति समेत जिले में कई डीएम बदले, कानपुर मंडल में मंडलायुक्त, ऊर्जा विभाग के सचिव व जिम्मेदार अफसरों ने भी अपना काम नहीं किया। इससे ही कंपनी को धांधली करने का पूरा मौका मिला। अब ठीक से जांच होने पर पर्दे के पीछे के कई खिलाड़ी सामने आ सकते हैं।
सीधे निगरानी करने वाले तत्कालीन एडीएम भूमि-अध्याप्ति कानपुर व सेवानिवृत्ति के बाद वर्तमान में लखनऊ के गोमती नगर विस्तार में रह रहे ओके सिंह व उनके कार्यालय के तत्कालीन कर्मियों, संबंधित ऋण प्रदाता बैंकों के अफसर-कर्मियों पर केवल धोखाधड़ी, जालसाली, कूटरचित दस्तावेज बनाने, सरकारी संपत्ति को नुकसान समेत अन्य धारा में 12 अप्रैल को मुकदमा दर्ज कर इतिश्री कर ली गई।
डीएम कपिल सिंह ने प्रकरण को संज्ञान में लिया तो शासन स्तर से कार्रवाई शुरू हुई। उन्होंने बताया कि शासन की जीरो टालरेंस नीति के तहत कार्रवाई की जा रही है। एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने बताया कि कोई भी दोषी छोड़ा नहीं जाएगा।
भोगनीपुर तहसील अंतर्गत चपरघटा में 1320 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगाने को वर्ष 2011 में हरियाणा की मेसर्स लैंको अनपरा पावर लिमिटेड व मेसर्स हिमावत पावर लिमिटेड को 944 हेक्टेयर जमीन 30 साल की लीज पर दी गई थी। 15 वर्ष में परियोजना का काम शुरू नहीं करने व बिना शासन की अनुमति के ऋण लेने पर आवंटन बीते बुधवार को रद कर सरकार ने जमीन वापस ली है।
राज्यपाल की अनुमति के बाद जमीन को ऊर्जा विभाग व राज्य सरकार के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया जिलाधिकारी ने शुरू कर दी है। मामले में एसआइटी ने दोनों कंपनियों के प्रबंधन से जुड़े तीन अधिकारियों को एक साथ हैदराबाद से गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
सस्ते दाम में दूसरी कंपनी ने ले ली 350 हेक्टेयर जमीन
आइडीबीआइ बैंक ने बंधक जमीन में से करीब 350 हेक्टेयर भूमि को चार जनवरी,2024 को ग्रो फास्ट गोल्ड माइंस कंपनी को 49.50 लाख रुपये में नीलाम कर दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन की कीमत अधिक है पर बैंक अफसरों ने मिलीभगत कर नीलामी की। हालांकि, प्रशासन ने बिक्री जमीन के दाखिल-खारिज पर रोक लगा कर सरकार की जमीन होने व इस पर कब्जा या विक्रय करना अपराध है, ऐसा लिखा बोर्ड मौके पर लगा दिया है।
