जागरण संवाददाता, कानपुर देहात: जनपद में जलभराव व गंदगी से उल्टी दस्त, बुखार व मलेरिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। बीमारी की चपेट में आकर मरने वालों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। मंगलवार को रसूलाबाद ब्लाक के उरिया के मजरा मक्का निवादा में बुखार व उल्टी से पीड़ित एक महिला की मौत हो गई। जिले में दो माह में बीमारी से मरने वालों की संख्या 16 हो गई है।

जिले में बारिश के बाद जगह-जगह हुए जलभराव व गंदगी से मलेरिया, वायरल डायरिया आदि संक्रामक बीमारियों का प्रकोप उग्र रूप ले रहा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। सूचना पर स्वास्थ टीमों के इलाज की एक दिन की खाना पूरी कर लौट जाने से मरीज झोलाछापों से इलाज कराने को मजबूर हैं। जनवरी से जून तक सरकारी अस्पतालों में बुखार पीड़ितों की जांच में जहां 81 मरीज मलेरिया से पीड़ित मिले थे। मंगलवार को मक्का निवादा उरिया गांव के राम सनेही की पत्नी सुखदेई (55) की संक्रामक बीमारी से मौत हो गई।

इंसेट) बीमारी नियंत्रण के लिए जिला स्तर पर एक व ब्लाक स्तर पर दस रैपिड रिस्पांस टीमें गठित हैं। गांवों में टीमें भेजकर मरीजों का इलाज कराया जा रहा है। 93 गांवों व मलेरिया विभाग द्वारा चिन्हित 150 संवेदनशील गांवों में पैनी नजर रखी जा रही है। बीमारी से मरने वालों की रिपोर्ट जिले को उपलब्ध नहीं है। सत्यापन कराने के बाद अग्रिम कार्रवाई होगी। डा.एपी वर्मा, डिप्टी सीएमओ व संक्रामक रोग प्रभारी।

-इंसेट) मच्छर जनित बीमारी से बचाव के उपाय

- कूलरों का पानी सप्?ताह में एक बार अवश्?य बदलें।

- घर में कीट नाशक दवा छिड़कें, पानी न जमा होने दें।

-बच्?चों को ऐसे कपड़े पहनाएं जिससे हाथ पैर ढके रहें।

-सोते समय मच्?छरदानी का प्रयोग करें। मच्?छर भगाने वाली दवा का प्रयोग करें।

-नालियों में जला तेल या केरोसिन डालें।

- घरों के आसापास गंदगी जमा न होने दें ।

- झोलाछाप के इलाज से बचें, सरकारी अस्पताल या योग्य डाक्टर से ही इलाज कराएं

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