जागरण संवाददाता, कानपुर देहात : जनपद की स्वास्थ्य सेवा इस समय एंबुलेंस की कमी से जूझ रही है। इसके चलते इमरजेंसी हालत में मरीज को रेफर किए जाने के बाद उसके तीमारदार एंबुलेंस के लिए भटकते रहते हैं। बाद में निजी एंबुलेंस की सहायता लेने को मजबूर होते हैं। इस दौरान मरीज स्ट्रेचर पर ही पड़ा रहता है।

जिले की करीब 24 लाख से अधिक आबादी का जिम्मा संयुक्त जिला अस्पताल सहित 11 सामुदायिक स्वास्थ केंद्र, 5 प्राथमिक तथा 25 नवीन प्राथमिक स्वास्थ केंद्रों के ऊपर है। स्वास्थ केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल में रेफर किए जाने वाले मरीजों को ले जाने का दारोमदार 102 की 28, 108 की 17 तथा 3 एएलएस एंबुलेंस पर निर्भर है। ऐसे में एक एंबुलेंस पर कुल आबादी के सापेक्ष 50 हजार लोगों की जिम्मेदारी है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी कक्ष में प्रतिदिन 20-30 मरीज गंभीर स्थिति में भर्ती किए जाते हैं, जिनमें अधिकतर मरीजों को डॉक्टर रेफर कर देते हैं। घायल मरीजों को कानपुर नगर ले जाने के लिए मरीजों के तीमारदारों को एंबुलेंस नहीं मिलती है। एंबुलेंस के लिए परिजन अस्पताल के अलावा बाहर भी चक्कर लगाते हैं। इसके चलते मरीज घंटों स्ट्रेचर पर पड़ा रहता है, जिससे उसकी जान जोखिम में पड़ जाती है। कभी-कभी इसी बीच उसकी मौत तक हो जाती है। या फिर हालत इतनी बिगड़ जाती है रास्ते में मरीज दम तोड़ देता है। सबसे ज्यादा दिक्कत गरीब तीमारदारों की होती है। वह निश्शुल्क सुविधा की आस लिए अस्पताल में आते हैं। मगर यहां से जब उनको रेफर कर दिया जाता है, तब उनको कुछ नहीं सूझता है कि वह अब क्या करें। कई बार जब मामला अधिकारियों तक पहुंच जाता है तब वह सीएमएस से कहकर गंभीर मरीज के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था कर देते हैं मगर ऐसा बहुत ही कम होता है। ज्यादातर तीमारदारों को मरीज यहां से ले जाने के लिए कड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ता है। औसत के सापेक्ष कम एंबुलेंस होने के बाबत शासन को पत्र भेजा जा चुका है। प्रत्येक जरूरतमंद मरीज को इमरजेंसी में एंबुलेंस मुहैया कराने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

-डॉ. हीरा सिंह (मुख्य चिकित्साधिकारी)

Posted By: Jagran