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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 18, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

world museum day 2022 : यहां मिलेगा कानपुर का गौरवशाली इतिहास, आज भी है 21 बार नाम बदलने के प्रमाण और शाही फरमान

By Abhishek AgnihotriEdited By:
Published: Wed, 18 May 2022 09:35 AM (IST)

अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर कानपुर में बिठूर संग्रहालय में प्राचीन सिक्के शिलाखंड के साथ क्रांतिकारियों के हथियार गौरवशाली इतिहास बयां ...और पढ़ें

कानपुर के बिठूर में नानाराव पार्क में है संग्राहलय।
कानपुर के बिठूर में नानाराव पार्क में है संग्राहलय।

कानपुर, [अंकुश शुक्ल]। 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम से शहर से गहरा नाता रहा है। इसके प्रमाण आज भी बिठूर के संग्रहालय में मौजूद हैं, जो क्रांतिकारियों के संघर्ष की गौरवगाथा व आजादी के तरानों का बखान करते हैं। संग्रहालय में 1857 की क्रांति, तात्या टोपे, अजीमुल्लाह खां की शौर्य गाथा के साथ प्राचीन सिक्के, ऐतिहासिक शिलाखंड, शाही फरमान, तलवार, रायफल, संगीनें, ज्योतिष शास्त्र, डाक टिकट व प्राचीन पदक शोभायमान हैं।

बिठूर के नानाराव पेशवा स्मारक पार्क में स्थापित संग्रहालय अखंड भारत के गौरवशाली इतिहास से जन-जन को परिचित करा रहा है। वर्ष 1947 में भारत पाकिस्तान बंटवारे के दुर्लभ फोटो के साथ कुषाण, मुगल, गुप्त वंश के सिक्के, अंग्रेजों की तलवारें, तात्या टोपे के खंजर, रायफल और संगीनें मौजूद हैं।

संरक्षित हैं पदक और प्रतीक चिह्न : संग्रहालय में ओरछा राज घराना, 1914 प्रथम विश्व युद्ध के पदक, मोहनजोदड़ो की अनुकृति, प्रथम गणतंत्र दिवस पर पुलिस पदक, 1951 में भारत के प्रथम जनगणना का पदक, 1939 द्वितीय विश्व युद्ध पदक, ब्रिटिश सरकार द्वारा जारी पदक, समर सेवा स्टार पदक, सेंट्रल रेलवे प्रतीक चिह्न, ईस्ट इंडिया रेलवे का बैज समेत कई ऐतिहासिक विरासत मौजूद हैं।

हर युग की मुद्राओं का भंडार : यहां चौथी से 19वीं सदी के सोने, चांदी व पत्थर के सिक्के आज भी मौजूद हैं। 1696 में बना जैनियों का भक्तांबर शास्त्र व ज्योतिष शास्त्र 1935 के दुर्लभ डाक टिकट और अंग्रेजी हुकूमत में जारी शाही फरमान भी संग्रहालय में रखे गए हैं। प्राचीन शिल्प लेख, अलंकृत शिलाखंड, अभिलिखित ईटें, कुषाण काल के उमा महेश्वर, लोकेश्वर, गणेश भगवान की प्रतिमा स्थापित है। यहां 1944 के एक रुपये से लेकर एक हजार के प्राचीन नोट भी मुद्रा भंडार में रखे हैं।

21 बार बदला शहर का नाम, 1948 में मिला कानपुर नाम : बहुत कम लोग जानते होंगे कि कानपुर की वर्तनी को 1770 से लेकर 1948 तक में 21 बाद परिवर्तित की गई है। इसके प्रमाण वर्षवार संग्रहालय में स्थापित हैं। वर्ष 1948 में कानपुर वर्तनी बनी। जो देश-दुनिया में पहचानी जा रही है।

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