US-Israel-Iran War का असर: 48 दिन में डामर 43 हजार महंगा, यूपी में 10,000 करोड़ के सड़क प्रोजेक्ट्स ठप
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण बिटुमिन (डामर) की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे उत्तर प्रदेश में ...और पढ़ें

HighLights
रिंग रोड में डामरीकरण का कार्य रुका, कराए जा रहे हैं सीमेंट आदि के कार्य
10 हजार करोड़ रुपये के जिले के सड़क निर्माण के विकास कार्य प्रभावित
एक किमी लंबी सड़क के निर्माण की लागत सवा तीन लाख रुपये तक बढ़ी
रितेश द्विवेदी, कानपुर। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब विकास कार्यों पर दिखने लगा है। खासतौर पर सड़क निर्माण परियोजनाएं सीधी चपेट में आ गईं हैं। बिटुमिन (डामर) की कीमतों में बीते 48 दिनों के भीतर करीब 43 हजार रुपये प्रति मीट्रिकटन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे सड़क निर्माण की लागत दोगुणा उछाल आया है। हालात यह हैं कि जिले में करीब 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से चल रहे सड़क निर्माण कार्य ठप हो गए हैं। रिंग रोड में डामर की आपूर्ति नहीं होने से डामरीकरण फिलहाल रोक दिया गया है।
डामर के रेट बीते 48 दिनों में 47 हजार से बढ़कर 90 हजार मीट्रिक टन पहुंच गए हैं। रेट बढ़ने के साथ ही आपूर्ति भी मांग के अनुसार रिफाइनरी से नहीं हो पा रही है। जिससे सड़कों का विकास कार्य प्रभावित हो रहा है। जिन ठेकेदारों ने 40 हजार रुपये प्रतिटन के हिसाब से टेंडर लेकर काम शुरू किया था, वे अब 90 हजार रुपये प्रतिटन तक पहुंच चुके डामर के दाम के चलते गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए हैं।
शहर की महत्वाकांक्षी 93 किमी लंबी रिंग रोड परियोजना भी इससे अछूती नहीं रही है। पैकेज वन में डामरीकरण का कार्य रोक दिया गया है, अन्य पैकेज में मिट्टी भराव के साथ ही सीमेंट से संबंधित कार्य किए जा रहे हैं। ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा दरों पर काम जारी रखना संभव नहीं है।
तीन मीटर चौड़ी और एक किमी लंबी सड़क के निर्माण पर पहले जहां करीब तीन लाख रुपये का खर्च आता था, वहीं अब यह लागत बढ़कर करीब सवा छह लाख रुपये हो गई है, लगभग सवा तीन लाख रुपये सड़कों के डामरीकरण में प्रति किमी अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं।
एनएचएआइ ने दी राहत, पीडब्ल्यूडी चुप
मंत्रालय के निर्देश पर एनएचएआइ ने कार्यदायी संस्थाओं को कुछ राहत दी है। अब तक महंगाई भत्ता (एस्केलेशन) हर तीन माह में दिया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत इसे हर माह जारी करने के आदेश दिए गए हैं, जिससे ठेकेदारों को आंशिक राहत मिली है। हालांकि, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया है। पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार राज्य सरकार से राहत पैकेज की उम्मीद लगाए बैठे हैं। नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआइ के अधिकारियों का कहना है कि डामर की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही तो अतिरिक्त बजट मांगना पड़ेगा। अन्यथा, परियोजनाओं को समय पर पूरा करना संभव नहीं होगा।
मथुरा और बठिंडा से नहीं मिल पा रही आपूर्ति
बिटुमिन की आपूर्ति मुख्य रूप से मथुरा और पंजाब के बठिंडा स्थित रिफाइनरियों से होती है। मौजूदा हालात में इन दोनों रिफाइनरियों से पहले से दिए गए एडवांस आर्डर की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियां काम जारी नहीं रख पा रही हैं। वहीं बल्क में डीजल आपूर्ति की खरीद भी ठेकेदार नहीं कर पा रहे हैं। इससे अन्य निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
बोले जिम्मेदार...
डामर के रेट बढ़ने और आपूर्ति मांग के अनुरूप नहीं होने से रिंग रोड में डामरीकरण का कार्य प्रभावित हुआ है। ठेकेदारों को नुकसान न हो इसके लिए मंत्रालय ने नया शासनादेश जारी किया है, जिसमें प्रत्येक माह समीक्षा करके महंगाई भत्ता जोड़कर भुगतान किया जाएगा, पहले यह प्रक्रिया तीन माह में होती है। प्रोजेक्ट की समय सीमा को भी बढ़ाया जा सकता है।
पंकज यादव, परियोजना निदेशक, एनएचएआइ
डामर की कीमत बढ़ने से रिंग रोड में निर्माण गति प्रभावित हुई है। डामरीकरण को छोड़कर अन्य कार्य किए जा रहे हैं।
सतवीर सिंह, प्रोजेक्ट निदेशक, रिंग रोड पैकेज वन
सड़क निर्माण के लिए जो अनुबंध पूर्व में किए गए थे, ठेकेदारों को उसी के अनुरूप कार्य करना होगा। अगर शासन से कोई दिशानिर्देश हुए तो उसके अनुरूप कार्य किया जाएगा।
रविदत्त कुमार, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी
राज्य सरकार से रेट रिवीजन या विशेष राहत पैकेज की घोषणा नहीं की जाती, तब तक काम दोबारा शुरू करना संभव नहीं है। डामर की बढ़ती कीमतों को देखते हुए अनुबंध शर्तों में संशोधन किया जाए और लागत के अनुसार भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
बालेंद्र भदौरिया उर्फ मुन्ना तेरा, अध्यक्ष, पीडब्ल्यूडी कांट्रैक्टर एसोसिएशन
