एजीएम से पहले यूपीसीए में कमेटियों का खेल शुरू, अनुभवहीन नामों पर चल सकती कैंची
यूपीसीए की वार्षिक आम सभा (एजीएम) 30 सितंबर को कानपुर में होगी, जिसमें पूर्व दिग्गजों की वापसी और नए कोचिंग ...और पढ़ें

HighLights
सीनियर रणजी टीम में सहायक कोच बन सकते राहुल, खांडेकर को अंडर-23 में सहायक कोच की कुर्सी
30 को यूपीसीए की एजीएम, पहली बार दो कोच के नाम की हो सकती घोषणा, ज्ञानेंद्र व अरविंद दौड़ में यूपीसीए
जागरण संवाददाता, कानपुर। उप्र क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) की वार्षिक आम सभा (एजीएम) में उप्र के पूर्व दिग्गजों की वापसी हो सकती है। 30 सितंबर को होटल लैंडमार्क में होने वाली एजीएम में सीनियर क्रिकेट टीम का कोच ज्ञानेंद्र पांडेय को बनाया जा सकता है। वे इस पद के प्रबल दावेदार हैं। उनके साथ वर्तमान कोच अरविंद कपूर भी मुख्य कोच की भूमिका निभा सकते हैं।
पहली बार यूपीसीए दो कोच ला सकता है। इसी प्रकार अंडर-23 टीम शशिकांत खांडेकर की वापसी हो सकती है। राहुल सप्रू को सीनियर टीम का सहायक कोच बनाया जा सकता है। लेकिन एडवाइजरी कमेटी की सिफारिश में कई ऐसे नाम भी शामिल हैं, जिनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा और उनके जिम्मेदारी दी जा रही है।
इसके साथ ही उप्र से एक भी मैच नहीं खेलने वाले कई जुगाड़बाज यूपीसीए की अंडर-23, अंडर-19, अंडर-16, सीनियर वूमेंस, जूनियर बालिका क्रिकेट की कमेटियों में दिख सकते हैं। जिनके नाम एडवाइजरी कमेटी से तो फाइनल किए गए हैं, लेकिन एजीएम से पहले विरोध को देखते हुए उनके नाम पर कैंची चल सकती है। पिछले वर्ष मुख्य कोच की भूमिका में रहे पूर्व क्रिकेटर के साथ ध्रुव सिंह, मुमताज के नाम पर मंथन अभी जारी है।
यूपीसीए की नई कार्यकारिणी में अनुभवहीन कोचिंग व सपोर्ट स्टाफ के नाम की चर्चा जोरो पर चल रही है। 20 वर्ष से रणजी खिताब की दौड़ से बाहर उप्र की कमान एक बार फिर से उप्र से दो और रेलवे को मिलाकर 15 रणजी मैच के अनुभव वाले अरविंद कपूर को देने की तैयारी चल रही है।
वहीं, हरियाणा के ध्रुव सिंह व सर्विसेज के मुमताज कादिर के नाम भी शामिल हैं। जिन्हें कोचिंग व सपोर्ट स्टाफ में जगह मिल सकती है। लंबे समय से उप्र क्रिकेट में अहम पदों पर काबिज रहे अरविंद कपूर की देखरेख में उप्र की सीनियर टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है।
उप्र की टीम रणजी के लीग चरण से ही फिर बाहर हो गई। विजय हजारे व सैयद मुश्ताक अली टी-20 ट्राफी में भी उप्र सीनियर टीम का प्रदर्शन फीका रहा। जानकार बताते हैं कि 2005-06 में उप्र ने बंगाल के खिलाफ पहली बार रणजी का खिताब जीता था।
उसके बाद से कई कोच बदले गए पर उप्र की किस्मत नहीं बदली। अब उप्र नए प्रयोग से लाल व सफेद गेंद से होने वाले मुकाबलों के लिए अलग-अलग कोच को रखने की योजना बना चुका है। यूपीसीए की ओर से विचार में लाए जा रहे नामों की अनुभवहीनता अब सवालों के घेरे में खड़ी दिख रही है।
