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UP Roadways में रिश्वतखोरी; कानपुर में संविदा चालक व परिचालकों से ड्यूटी दिलाने के नाम पर होती वसूली, Audio Viral

Published: Sat, 05 Sep 2026 03:47 PM (IST)

कानपुर में परिवहन निगम के संविदा चालकों और परिचालकों ने डिपो के अधिकारियों पर ड्यूटी और रूट आवंटन के नाम ...और पढ़ें

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HighLights

  1. संविदा चालकों-परिचालकों से ड्यूटी के लिए रिश्वत की मांग।

  2. मासिक 5-6 हजार रुपये की मांग, न देने पर प्रताड़ना।

  3. कानपुर क्षेत्रीय प्रबंधक ने जांच और सख्त कार्रवाई का आश्वासन।

जागरण संवाददाता, कानपुर। नगर निगम, आरटीओ और केस्को के बाद अब परिवहन निगम (रोडवेज) में भी संगठित भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगी हैं। रोडवेज के संविदा चालक और परिचालकों ने अपने ही डिपो के बाबुओं व अधिकारियों की रिश्वतखोरी का पर्दाफाश किया है।

आरोप है कि बसों पर ड्यूटी लगवाने और रूट आवंटित करने के नाम पर चालक-परिचालक से पांच से छह हजार रुपये तक मासिक घूस मांगी जा रही है। जो संविदा कर्मी यह अवैध रकम देने से इन्कार करते हैं, उन्हें ड्यूटी से हटा दिया जाता है और मामूली बातों पर दंडात्मक कार्रवाई की धमकी देकर प्रताड़ित किया जाता है।

परिवहन विभाग में वर्तमान में बड़ी संख्या में संविदा चालक और परिचालक कार्यरत हैं। नियमानुसार इन्हें दो रुपये 18 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान किया जाता है। एक चालक-परिचालक महीने में अधिकतम छह हजार किलोमीटर बस चला सकता है, जिससे उसका कुल मासिक मानदेय लगभग 13 हजार रुपये बनता है। यदि डिपो से ड्यूटी ही न मिले, तो यह भुगतान स्वतः कम हो जाता है।

विकास नगर डिपो में तैनात छिबरामऊ निवासी चालक रामकुमार कश्यप ने अधिकारियों से हुई बातचीत की आडियो रिकार्डिंग उपलब्ध कराई है, जिसमें उनसे छह हजार रुपये की मांग की जा रही है। रामकुमार का आरोप है कि बीमार होने के बावजूद पैसा न देने पर उनके साथ अभद्रता और मारपीट की गई। उन्होंने बताया कि विकास नगर डिपो में ड्यूटी स्लिप लेने तक के लिए 200 रुपये की रिश्वत वसूली जाती है।श्

इसलिए है ड्यूटी की मारामारी

13 हजार रुपये के मानदेय पर छह हजार रुपये की रिश्वत देने के पीछे की वजह भी चौंकाने वाली है। कर्मियों के अनुसार अधिकारी व बाबू इस बात का दबाव बनाते हैं कि रास्ते में बिना टिकट सवारियां बैठाई जाएं और माल ढुलाई की जाए। इसी अवैध कमाई के भरोसे कर्मियों से बंधी-बंधाई मासिक वसूली की जाती है।


आडियो के प्रमुख अंश

बातचीत - 1

 

  • पहला व्यक्ति : अब देखो, लाला भैया से पूछ लो, गाड़ी तो आज चली गई। वे कह रहे हैं कि कंडक्टर-ड्राइवर नहीं आ रहे।
  • दूसरा व्यक्ति : अच्छा।
  • पहला व्यक्ति : हां, और तुम सोमवार को 6,000 रुपये की व्यवस्था करके लाओ। सोमवार को तुम्हारी गाड़ी आएगी, तब तुम्हें ड्यूटी दी जाएगी।
  • दूसरा व्यक्ति : अच्छा।
  • पहला व्यक्ति : हां, कल मुकेश भैया आए हैं। किसी से बात ओपन मत करना।
  • दूसरा व्यक्ति : नहीं-नहीं, हम काहे ओपन करेंगे।
  • पहला व्यक्ति : एक आदमी के पांच हजार रुपये लगते हैं।


बातचीत - 2

 

  • पहला व्यक्ति : मुकेश बाबू और एआरएम साहब से बात हुई है।
  • दूसरा व्यक्ति : हां, क्या बात हुई?
  • पहला व्यक्ति : उन्होंने कहा कि तुम्हारे आदमी हैं तो दोनों के छह हजार रुपये ले लो और ड्यूटी खोल दो। छह हजार की व्यवस्था करके सुबह यहीं आ जाओ।
  • दूसरा व्यक्ति : अच्छा-अच्छा।


बातचीत - 3

 

  • पहला व्यक्ति : दादा, पैसा नाजायज तो नहीं मांग रहे हैं?
  • दूसरा व्यक्ति : अरे यार, नाजायज नहीं। जब अधिकारी बिना पैसे के काम करता ही नहीं है, तो क्या करोगे? ऐसा कोई कंडक्टर-ड्राइवर नहीं है, जिसे रूट मिलने के लिए पैसा न देना पड़े।
  • पहला व्यक्ति : हां, बात तो सही है।


बातचीत - 4

  • पहला व्यक्ति : दद्दा, नमस्कार। कुछ सिफारिश लगा दो।
  • दूसरा व्यक्ति : किस बात की?
  • पहला व्यक्ति : रूट नहीं खोल रहे हैं। क्या करें, घर लौट आए हैं। गाड़ी डिपो में खड़ी है।
  • दूसरा व्यक्ति : हम तो अभी आ नहीं रहे, जितेंद्र बाबू से कहते हैं।


बातचीत - 5

  • पहला व्यक्ति : तुमने पैसे की बात नहीं की?
  • दूसरा व्यक्ति : नहीं, हमने तो नहीं की। क्या पैसे देने पड़ेंगे?
  • पहला व्यक्ति : बिना पैसे के काम नहीं होता। दो लोगों के पांच-पांच हजार रुपये तक दे दो।
  • दूसरा व्यक्ति : किन्हें, आरएम साहब को?

 

अधिकारी का पक्ष

मामला संज्ञान में आया है। यदि कर्मचारियों से ड्यूटी के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है, तो पूरे प्रकरण की निष्पक्ष विभागीय जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी।
-महेश कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, कानपुर परिक्षेत्र (परिवहन निगम)