यूपी में 2000 करोड़ से AI मिशन, 2031 तक 75 जिलों में बनेगा ढांचा, पांच लाख युवाओं को बनाएगा दक्ष
उत्तर प्रदेश सरकार ने अगले पांच वर्षों में 2000 करोड़ रुपये के 'यूपी एआई मिशन' की घोषणा की है, जिसका ...और पढ़ें

सीएसजेएमयू में आयोजित एआइ मंथन 2.0 में लगे स्टालों पर जानकारी लेतीं राज्यपाल आनंदी बेन पटेल । साथ में कुलपति प्रो.विनय कुमार पाठक। जागरण
HighLights
प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने बताया रोडमैप, पांच लाख एआइ दक्ष युवा और 200 से अधिक एआइ लैब बनाने का लक्ष्य
20 से ज्यादा सेंटर आफ एक्सीलेंस, हर जिले में ‘सीएम एआइ फेलो’; जीएसडीपी में एक प्रतिशत योगदान का लक्ष्य
जागरण संवाददाता, कानपुर। उत्तर प्रदेश को एआइ सक्षम राज्य बनाने के लिए अगले पांच वर्षों में 2,000 करोड़ रुपये का मिशन चलाया जाएगा। प्रदेश में एआइ प्रतिभा और भविष्य के कौशल विकसित करने से लेकर डेटा, उन्नत कंप्यूटिंग और भरोसेमंद एआइ का ढांचा तैयार किया जाएगा। वर्ष 2031 तक सभी 75 जिलों में यह तंत्र विकसित करने, पांच लाख युवाओं को एआइ दक्ष बनाने, 200 से अधिक हैंड्स-आन एआइ लैब और 20 से ज्यादा सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापित करने का लक्ष्य है। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने शनिवार को ‘एआइ मंथन 2.0’ में प्रदेश की एआइ कार्ययोजना सामने रखते हुए यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में यूपी एआइ मिशन के लिए 225 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। एआइ के माध्यम से नागरिक सेवाओं में सुधार, शासन की कार्यक्षमता बढ़ाने तथा उद्योगों और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जाएगा। प्रत्येक जिले में ‘सीएम एआइ फेलो’ के माध्यम से एआइ गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है। प्रदेश की जीएसडीपी में एआइ का कम से कम एक प्रतिशत प्रत्यक्ष योगदान सुनिश्चित करने का लक्ष्य भी रखा गया है।

सीएसजेएमयू में आयोजित एआइ मंथन 2.0 को आनलाइन संबोधित करते आइटी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार । इंटरनेट मीडिया
प्रमुख सचिव के अनुसार मिशन के तहत एआइ ट्रस्ट एवं एश्योरेंस, यूपी एआइ स्टैक व स्टेट डेटा एक्सचेंज, एआइ टैलेंट व फ्यूचर स्किल्स, शोध एवं सेंटर आफ एक्सीलेंस, स्टार्टअप व एमएसएमई सहयोग तथा उन्नत कंप्यूटिंग ढांचे पर काम होगा। इससे प्रदेश में एआइ आधारित शोध, नवाचार और रोजगार को बढ़ावा देने की तैयारी है।
राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में जन भवन, उत्तर प्रदेश और सीएसजेएमयू के संयुक्त तत्वावधान में ‘एआइ मंथन 2.0’ का शुभारंभ हुआ। इसमें प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, वित्त अधिकारी और तकनीकी टीम समेत 500 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए।
इस अवसर पर राज्यपाल की निजी सचिव डा. सुधीर एम. बोबडे ने कहा कि एआइ के माध्यम से उच्च शिक्षा की समस्याओं का समाधान तलाशा जाएगा। स्मार्ट कंटेंट, स्वचालित मूल्यांकन, एआइ आधारित प्रवेश व्यवस्था और करियर एक्सेलेरेटर जैसी व्यवस्थाएं विकसित करने पर काम होगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 56 लाख विद्यार्थी ‘समर्थ’ रजिस्ट्री से जुड़े हैं।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने एआइ के विकास और जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दिया। आईआईटी खड़गपुर के प्रो. पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती ने स्थानीय भाषाओं में एआइ सामग्री, एआइ ट्यूटर और ‘कृषि मित्र’ जैसी संभावनाएं बताईं। स्वास्थ्य क्षेत्र में एआइ की भूमिका पर फिलिप्स इंडिया एवं ट्रिपल आइटी इलाहाबाद के डा. दिनेश एमएस ने कहा कि यह मेडिकल इमेजिंग, कैंसर की शुरुआती पहचान और चिकित्सकीय निर्णय में सहायक हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआइ चिकित्सक का विकल्प नहीं, बल्कि निर्णय में सहयोग देने वाली तकनीक है।
