कानपुर, जागरण संवाददाता। मसाला कारोबारी सूर्यांश खरबंदा की कंपनी के खातों से 95 लाख रुपये निकालने वाला साइबर ठगों का गिरोह बेहद चालक है। पुलिस को गिरोह की कार्यप्रणाली की जो जानकारी मिली है, उससे सामने आया है कि गिरोह के सभी सदस्य रहते हैदराबाद में थे, लेकिन ठगी की वारदात को अंजाम देने वह हवाई जहाज से बेंगलुरु जाते थे।

रसोई मसाला कारोबारी अशोक नगर निवासी सूर्यांश खरबंदा की पत्नी की 19 नवंबर 2021 को संदिग्ध हालातों में मुत्यु हो गई थी। इस मामले में सूर्यांश व उसकी मां निशा खरबंदा को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इस घटना के कुछ दिनों बाद ही सूर्यांश की कंपनी मेसर्स आक्सो इंपैक्स के बैंक खातों से करीब 95 लाख रुपये निकाले जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने इस प्रकरण में यारा साई किरन पुत्र रामा लिंगा वारा प्रसाद निवासी सिरी साउद्धा, राजीव नगर, एसआर नगर हैदराबाद और निमग्दा फनी चौधरी पुत्र वेन्कट राव निवासी प्रशान्ति गोल्डेन, एवेन्यू प्रशान्ति नगर थाना बचुपल्ली, हैदराबाद को गिरफ्तार किया था।

डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि जांच व पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह में पांच आरोपित हैं और सभी हैदराबाद के रहने वाले हैं। हैदराबाद में रहने के दौरान वह जिन मोबाइल नंबरों का प्रयोग करते थे, उनका प्रयोग साइबर ठगी के लिए नहीं करते थे। जब भी वह किसी शिकार को फंसाते थे तो पूरी टीम हवाई जहाज से बेंगलुरू जाती। वहां कई दिनों तक होटले में रुकते और दूसरे मोबाइल नंबरों व फोन का प्रयोग करते। वहां से जहां भी उन्हें जाना होता वह हवाई जहाज से ही जाते। कानपुर भी वह वाया लखनऊ एयरपोर्ट से आए थे।

एक को छोड़कर सभी पढ़े लिखे- साइबर ठगों के इस गिरोह में यारा साई किरन ही केवल इंटर तक पढ़ा था। अन्य सदस्य अच्छे पढ़े लिखे थे। फनी चौधरी एमसीए किए हुए था, जबकि अन्य तीनों सदस्य बीटेक पास हैं।

डाकिया पर भी लटकी तलवार- डीसीपी ने बताया कि पहले पूछताछ में डाकिया ने दावा किया था कि उसने नई चेकबुक सूर्यांश के घर पर दी थी। मगर, आरोपितों के पकड़े जाने के बाद सामने आया है कि डाकिया ने साइबर ठगों को डाकघर में ही चेकबुक दे दी थी। क्राइम ब्रांच इस प्रकरण की रिपोर्ट डाक विभाग को देगी, ताकि डाकिया के खिलाफ विभागीय कार्रवाही हो सके। 

Edited By: Abhishek Agnihotri