कानपुर, जेएनएन। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 30 करोड़ रुपये गलत तरीके से खर्च किए गए हैं। इन्हें वेतन, प्रोजेक्ट, सेमिनार और अन्य आयोजन के लिए लिया गया था, लेकिन समायोजित नहीं किया गया। इनमें से कई के पक्के रिकार्ड नहीं हैं। विश्वविद्यालय के 2013 से अब तक के कई रिकार्ड में गड़बड़ी मिली है। सीएसए प्रशासन ने कई अधिकारियों को नोटिस देने की तैयारी की है। इन गड़बड़ी के खेल में आधा दर्जन लिपिकों के भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। उनसे सवाल जवाब भी किया जा सकता है।

वित्तीय अनियमितताओं पर विश्वविद्यालय की बहुत किरकिरी हो चुकी है। जन प्रतिनिधि और विश्वविद्यालय प्रबंधकीय बोर्ड के सदस्यों की ओर से भी कई शिकायतें की गईं। शासन की सख्ती से विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। 2013 से 2020 तक के खाते खंगाल लिए गए हैं। अब 1990 से पुरानी फाइलें खंगालने की तैयारी चल रही है। कुछ बड़े प्रोजेक्ट की फाइल निकाली जाएगी।

सेवानिवृत लिपिक से पूछताछ : दो दिन पहले विश्वविद्यालय के एक निदेशक सेवानिवृत हो चुके वरिष्ठ लिपिक और आलू के प्लान में चयनित कृषि विशेषज्ञ से पूछताछ कर चुके हैं। उनसे कुछ फाइलें तलाशने में मदद ली जाएगी।

डीजल में हुआ खेल : डीजल में भी खेल किया गया है। पूर्व और वर्तमान के कुछ अधिकारियों के वाहनों में अधिक तेल इस्तेमाल हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन इसकी जांच करा रहा है। उन केंद्रों और सेंटर से रजिस्टर मंगवाए गए हैं।

केवीके के विशेषज्ञों को भेजा : विश्वविद्यालय से संबद्ध किए गए कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञों को उनकी मूल तैनाती पर भेज दिया गया है। इनकी संख्या करीब 40 है। कुलपति डा. डीआर सिंह ने इसकी पुष्टि की है।

Edited By: Abhishek Agnihotri