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टीसीएल ने घाटे से उबरकर कमाया मुनाफा! रक्षा उत्पादन में बनाया रिकॉर्ड, जवानों की वर्दी भी बनाई, सुखोई का ब्रेक पैराशूट भी

Published: Fri, 02 Oct 2026 02:14 PM (IST)

आयुध निर्माणियों के निगमीकरण के पांच साल बाद, ट्रूप कंफर्ट्स लिमिटेड (TCL) घाटे से उबरकर मुनाफे में आ गई है। ...और पढ़ें

ओईएफ, कानपुर के प्लांट में बन रहे बूट बनाने का चल रहा काम।

ओईएफ, कानपुर के प्लांट में बन रहे बूट बनाने का चल रहा काम।

HighLights

  1. टीसीएल ने घाटे से उबरकर 8.83 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया

  2. कंपनी ने 48.45 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड निर्यात किया

  3. सेना की वर्दी, सुखोई पैराशूट सहित कई नए रक्षा उत्पाद बनाए

जागरण संवाददाता, कानपुर। आयुध निर्माणियों के निगमीकरण के पांच साल पूरे होते-होते तस्वीर बदलने लगी है। रक्षा मंत्रालय की पीएसयू ट्रूप कंफर्ट्स लिमिटेड (टीसीएल) ने न सिर्फ घाटे से उबरकर मुनाफा कमाया है, बल्कि निर्यात और उत्पादन दोनों मोर्चों पर नया रिकार्ड बनाया है। सेना की वर्दी से सुखोई के पैराशूट तक बनाकर टीसीएल पांच साल में मुनाफा कमाने की राह पर आगे बढ़ी है।

मल्टी स्पेक्ट्रल कैमोफ्लाज नेट्स के लिए इन-हाउस टेस्टिंग सुविधा स्थापित करने वाली टीसीएल पहली डीपीएसयू बन गई है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 8.83 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी को 132.96 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इस दौरान कंपनी की परिचालन आय में 61 प्रतिशत की बड़ी छलांग लगी है और यह बढ़कर 891.16 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

कंपनी की सबसे बड़ी कामयाबी निर्यात के मोर्चे पर रही। नेपाल, सूरीनाम और मलेशिया को 48.45 करोड़ रुपये का रिकार्ड निर्यात किया गया। कांबैट मिलिट्री यूनिफार्म और सुखोई-30 ब्रेक पैराशूट के आर्डर मिलने से दक्षिण अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया में कंपनी की पहुंच और मजबूत हुई है।

टीसीएल अब सेना के साथ-साथ अर्धसैनिक और नागरिक संस्थानों की भी जरूरतें पूरी कर रही है। कंपनी ने नार्दर्न रेलवे, एचएएल, पुडुचेरी, गढ़चिरौली, तमिलनाडु, उत्तराखंड और बिहार पुलिस फोर्स को सैन्य रक्षा उत्पादों की आपूर्ति की है। आत्मनिर्भरता की दिशा में कंपनी ने कठिन मौसम के लिए विशेष कपड़ों और पर्वतारोहण उपकरणों के स्वदेशी संस्करण विकसित किए हैं।

इनमें बूट क्रैम्पन, राक पिटन, मॉड्यूलर ग्लव्स, भारतीय सेना के लिए कीड़े भगाने वाली मच्छरदानी, अस्पताल के कंबल और उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले पप टेंट शामिल हैं। सुरक्षा उपकरणों के क्षेत्र में आयुध वस्त्र निर्माणी अवाडी में बाडी आर्मर, बैलिस्टिक हेलमेट और बम डिस्पोजल सूट के लिए नई उत्पादन यूनिट स्थापित की गई हैं। बूट उत्पादन क्षमता भी दोगुणी होकर तीन से बढ़कर छह लाख जोड़ी सालाना हो गई है। हाई एंकल रबर पीयू सोल वाले बूट के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन भी हासिल किया है।

हरित ऊर्जा के तहत रक्षा मंत्रालय के 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा क्षमता 1360 से बढ़ाकर 1810 किलोवाट की गई है। टीसीएल के नवनियुक्त सीएमडी डा. अनिल रंगा ने बताया कि विदेश में निर्यात आर्डर बढ़ाने के लिए नई कार्ययोजना बनाकर अमल में लाया जाएगा। साथ ही देश के सिविल मार्केट के लिए भी उत्पाद बनाए जाएंगे।

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