कानपुर, जेएनएन। अनियमित खानपान एवं अव्यवस्थित जीवनशैली के कारण तेजी से मधुमेह (डायबिटीज) पीडि़तों की संख्या बढ़ रही है। इससे बचना है तो सावधान हो जाएं। मधुमेह से बचने के लिए अभी से समाधान तलाशने शुरू कर दें। ये बातें एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में विश्व मधुमेह दिवस पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आयोजित वैज्ञानिक गोष्ठी में प्राचार्य प्रो. आरती लालचंदानी ने कहीं।

उन्होंने कहा कि तनाव और चिंता से कई तरह की बीमारियां होती हैं। इनमें से ही एक मधुमेह है, जो तेजी से बढ़ रही है। इससे निपटने के लिए जागरूकता जरूरी है। मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. रिचा गिरी ने कहा कि मधुमेह के लक्षण नजरअंदाज करने से जटिलताएं बढ़ती हैं। 30 वर्ष के युवा मधुमेह एवं ब्लड प्रेशर की समस्या लेकर आ रहे हैं, जो चिंता का विषय है। इससे बचाव के लिए धूमपान व अल्कोहल का सेवन न करें। सप्ताह में पांच दिन व्यायाम जरूरी है। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रो. परवेज खान ने मधुमेह की वजह से आंखों में होने वाली परेशानी व जटिलताओं के बारे में विस्तार से बताया।

बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत राव, डॉ. एसके गौतम, डॉ. शिवेंद्र वर्मा, डॉ. सौरभ अग्रवाल, डॉ. मोहित सचान ने मधुमेह एवं उसकी जटिलताओं पर चर्चा की। हैलट के प्रमुख अधीक्षक प्रो. आरके मौर्या, डॉ. जेएस कुशवाहा, डॉ. बीपी प्रियदर्शी, डॉ. प्रेम सिंह, डॉ. बृजेश कुमार, डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. विनय कुमार, डॉ. समीर गोविल, डॉ. कुनाल सहाय, डॉ. आदित्य कुमार, डॉ. एमपी सिंह, डॉ. रंजीत कुमार निम मौजूद रहे।

ओपीडी में मरीजों को किया जागरूक

एलएलआर अस्पताल (हैलट) के ओपीडी ब्लॉक में जन जागरुकता कार्यक्रम एवं मधुमेह जांच शिविर लगाया गया। इसमें एक हजार से अधिक मरीजों की ब्लड शुगर, यूरिक एसिड, ब्लड प्रेशर एवं बीएमआइ जांच निश्शुल्क की गई। उन्हें मधुमेह से बचने के लिए नियमित खानपान एवं व्यायाम करने की सलाह दी गई। 

Posted By: Abhishek

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