कानपुर, जेएनएन। एक अनगढ़ पत्थर को खूबसूरत प्रतिमा का आकार देने में एक मूर्तिकार (संगतराश) बहुत मेहनत करता है, पसीना बहाता है। जब प्रतिमा साकार होती है, लोग उसे बखानते हैं तो उसका हृदय गदगद हो जाता है। कानपुर में गंगा की लहरों पर सवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर संतोष के भाव उनके हृदय की यही खुशी बयान कर रहे थे। क्योंकि गंगा के उद्गम स्थल के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत खुद कानपुर में गंगा की निर्मलता की तारीफ कर रहे थे।

2014 में शुरू की थी नमामि गंगे योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में गंगा को निर्मल और स्वच्छ बनाने के लिए नमामि गंगे योजना प्रारंभ की थी। शनिवार को पहले उन्होंने चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में राष्ट्रीय गंगा परिषद की मैराथन बैठक में गंगा स्वच्छता का मौखिक हाल जाना। फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी के साथ अटल घाट पहुंचे। घाट पर पहुंचते ही उनका दिल खुश हो गया।

घाटों के बारे में जानकारी देते रहे सीएम

घाट से कलकल बहती हरियल गंगा अपनी निर्मलता के प्रयासों को मुहरबंद कर रही थीं। मां गंगा का अभिवादन कर उन्होंने प्रयागराज से आई बोट पर यात्रा प्रारंभ की। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन्हें घाटों के बारे में जानकारी देते जा रहे थे। सभी ने कानपुर में गंगा के इस रूप को सराहा। सीसामऊ नाला जब करीब आया तो मुख्यमंत्री ने इशारा करके बताया कि यही वह 128 साल पुराना ऐतिहासिक नाला है, जिसे बंद कराने से ही निर्मल गंगा की राह आसान हुई है। प्रधानमंत्री पहले ही इस नाले के बारे में काफी कुछ जान चुके थे। बोट किनारे लगी तो सबसे पहले पीएम यहां उतरे, फिर बाकी लोग।

चेहरे पर थे तसल्ली के भाव 

पीएम ने पहले इस नाले के पास खड़े होकर अकेले एक तस्वीर खिंचवाई। फिर सभी को इस नाले की जानकारी दी। यहां से बोट वापस अटल घाट के पास रवाना हुई। रास्ते में मैगजीन घाट समेत कई जगह किनारे बंधे पर खड़े युवाओं ने मोदी-मोदी का जयघोष किया तो प्रधानमंत्री की नजरें बरबस उधर चली गईं। उन्होंने हाथ हिलाकर इनका अभिवादन किया। अटल घाट पर उतरने के बाद जब प्रधानमंत्री अपनी गाड़ी में बैठने लगे और उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हाथ मिलाया तो उनके चेहरे पर तसल्ली के भाव थे।  

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