जेएनएन, कानपुर : पिछले दिनों बाबूपुरवा में पकड़े गए 265 रेमडेसिविर इंजेक्शन नकली निकले हैं। लखनऊ की फोरेंसिक लैब में हुई जांच में यह तथ्य सामने आया है। इस जानकारी के बाद पुलिस के माथे पर बल पड़ गए हैं। माना जा रहा है कि गिरोह ने 30 से 40 हजार रुपये की कीमत पर बड़े पैमाने पर नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बाजार में खपाए हैं, जिससे आने वाले समय में मरीजों के सामने संकट खड़ा हो सकता है। ऐसे में पुलिस आरोपियों से दोबारा पूछताछ कर सकती है, ताकि यह पता चलाया जा सके कि आरोपितों ने कितने इंजेक्शन किसे बेचे हैं।

यूपी एसटीएफ और बाबूपुरवा पुलिस ने मिलिट्री इंटेलीजेंस की मदद से किदवई नगर चौराहे के पास चेकिग के दौरान बाइक सवार दोस्तों को हिरासत में लेकर जब उनकी तलाशी ली तो उनके पास से 265 रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद हुए थे। पूछताछ में आरोपितों ने नाम बख्तौरीपुरवा नौबस्ता निवासी मोहन सोनी, पशुपति नगर निवासी प्रशांत शुक्ल और यमुना नगर हरियाणा निवासी सचिन कुमार बताया था। पुलिस ने पकड़े गए आरोपितों में मोहन को सरगना बताया गया था। पुलिस से पूछताछ में मोहन ने बताया कि तीन साल पहले उसने बंगाल के अपूर्वा मुखर्जी को 86 हजार रुपये उधार लिए थे। उधार दी रकम न लौटा पाने पर अपूर्वा ने उसे रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने के लिए भेजे थे। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से ग्राहक तलाश रहा था। इसने यह भी बताया था कि अपूर्वा ने वाराणसी निवासी अपने परिचित के माध्यम से बस से यह इंजेक्शन कानपुर भिजवाए थे। पुलिस अपूर्वा के अलावा वाराणसी कनेक्शन पर भी काम कर रही है। इसी बीच मंगलवार की देर शाम पुलिस को इस केस से जड़ा सनसनीखेज सच मालूम पड़ा। जांच के लिए जो सैंपल लखनऊ की फोरेंसिक लैब भेजा गया था। लैब ने परीक्षण के बाद रिपोर्ट दी है कि इंजेक्शन नकली हैं। इंस्पेक्टर बाबूपुरवा देवेंद्र विक्रम सिंह ने इंजेक्शन नकली पाए जाने की पुष्टि की है। बाताया जा रहा है कि इंजेक्शन में केवल डिस्टल वाटर है, जिसे रेमडेशिविर इंजेक्शन की बोतलों में पैक कर दिया गया है। सवाल यह भी है कि क्या असली बोतलों में नकली इंजेक्शन भरा गया या रैपर न अन्य तथ्य भी नकली हैं। हालांकि पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह जानना है कि आरोपितों ने कितने नकली इंजेक्शन बाजार में खपाए हैं। ताकि उन्हें मरीजों तक पहुंचने से पहले रोका जा सके। गौरतलब है कि नकली इंजेक्शन लगने पर मरीज की मृत्यु तक हो सकती है। कोरोना संक्रमित होने के कारण आइपीएस अपर्णा गुप्ता के नहीं दर्ज हो सके बयान, कानपुर : बर्रा के संजीत अपहरण और हत्याकांड में दागी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच अभी भी जारी है। मामले में आइपीएस अपर्णा गुप्ता समेत 11 पुलिस कर्मियों को निलंबित किया गया था। मामले में सिर्फ तत्कालीन सीओ गोविद नगर रहे मनोज गुप्ता को छोड़कर अन्य सभी की बहाली हो चुकी है। बहाल हुए पुलिस कर्मियों के खिलाफ लखनऊ आइजी रेंज लक्ष्मी सिंह मामले की जांच कर रही हैं, सोमवार को बहाल हुए पुलिस कर्मियों को बयान दर्ज कराने के लिए लखनऊ जाना था, लेकिन आइपीएस अपर्णा गुप्ता के कोरोना संक्रमित होने से बयान दर्ज नहीं हो सके। बर्रा-5 निवासी लैब टेक्नीशियन संजीत यादव को दोस्तों ने पार्टी के बहाने अगवा करने के बाद रतनलाल नगर में किराये के मकान में उसकी हत्या कर दी थी। कई दिन तक चली तलाश के बाद भी शव बरामद नहीं किया जा सका था। पूरे मामले में लापरवाही बरतने पर शासन ने 24 जुलाई, 2020 को एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता व तत्कालीन सीओ गोविदनगर मनोज गुप्त को निलंबित किया था। बाद में तत्कालीन बर्रा थाना प्रभारी रणजीत राय, चौकी इंचार्ज राजेश कुमार और सब इंस्पेक्टर योगेन्द्र प्रताप सिंह के अलावा कांस्टेबल अवधेश, डिशु भारती, विनोद कुमार, सौरभ पांडेय, मनीष व शिव प्रताप समेत 11 पुलिस कर्मियों पर निलंबन की कार्रवाई हुई थी। इन सभी पुलिस कर्मियों में गोविद नगर सीओ रहे मनोज गुप्ता को छोड़कर सभी की बहाली हो चुकी है। मामले में आइपीएस के खिलाफ जांच अभी जारी है। बहाल हुए पुलिस कर्मियों की जांच लखनऊ रेंज आइजी लक्ष्मी सिंह कर रही है। पुलिस कर्मियों ने बताया कि सोमवार को सभी को बहाल हुए पुलिस कर्मियों को लखनऊ रेंज आइजी ने बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था। पुलिस कर्मी वहां गए भी, लेकिन आइपीएस अपर्णा के कोरोना संक्रमित होने की जानकारी हुई। इसके बाद किसी के भी बयान दर्ज नहीं किए गए हैं। पुलिस कर्मियों ने बताया कि आगे की कोई तिथि नहीं मिली है। दोबारा नोटिस मिलने के बाद ही आगे की तिथि की जानकारी होगी। इस बारे में डीसीपी साउथ रवीना त्यागी से संपर्क नहीं हो सका।

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