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जांच न होने से भोजन देने में मनमानी

Publish Date:Sat, 13 Jan 2018 01:28 AM (IST) | Updated Date:Sat, 13 Jan 2018 01:28 AM (IST)
जागरण संवाददाता, कानपुर : जनपद के परिषदीय स्कूलों में जो स्वयंसेवी संस्थाएं मिडडे मील देती हैं,

जागरण संवाददाता, कानपुर : जनपद के परिषदीय स्कूलों में जो स्वयंसेवी संस्थाएं मिडडे मील देती हैं, नियमत: उस खाने की जांच करके खंड शिक्षा अधिकारी को हर माह रिपोर्ट देनी चाहिए पर जांच के नाम पर महज खानापूरी की जाती है। इसकी बानगी तब-तब देखने को मिली है, जब विद्यालयों में बच्चों को दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता जांची गई। पिछले एक माह की बात करें तो शायद ही अफसरों ने किसी स्कूल में खाने की जांच की हो। इसका कोई रिकॉर्ड भी विभाग के पास नही है। इस संबंध में बीएसए जय सिंह ने कहा कि स्वयंसेवी संस्थाओं को बेहतर गुणवत्ता का खाना देना होगा। ऐसा न करने पर उन्हें काली सूची में डालते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

व्यवस्था खस्ताहाल, निरीक्षण हवाई

वर्ष 2010 में विभाग की ओर से सेवा संस्था को काली सूची में डाला गया था। उसके बाद से नई 10 संस्थाओं को खाना देने की अनुमति दी गई। मिडडे मील का सच किसी से छुपा नहीं है। हो सकता है कुछ संस्थाएं सही खाना दे रही हों लेकिन ज्यादातर गुणवत्ता का ध्यान नहीं रख रहीं। अगर समय पर और गंभीरता से निरीक्षण कर कार्रवाई की जाती तो स्थिति में सुधार होता। पिछले आठ वर्षो में कोई बड़ी कार्रवाई नही हुई।

मंडलायुक्त का निर्देश, जांच फिर भी नहीं : दैनिक जागरण के मिडडे मील अभियान का संज्ञान मंडलायुक्त पीके महान्ति ने गुरुवार को लिया था। उन्होंने डीएम को पत्र जारी कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। जिलाधिकारी ने संबधित अधिकारियों को निर्देशित किया पर शुक्रवार को किसी भी संस्था की जांच नहीं की गई।

फिर आया अक्षयपात्र का नाम

स्वयंसेवी संस्था अक्षयपात्र फाउंडेशन के माध्यम से बच्चों को मिडडे मील देने का मामला फिर उठ रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव देव प्रताप सिंह ने इस संबंध में मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के निदेशक को पत्र भेजा है। पिछली सरकार में अक्षयपात्र योजना के माध्यम से बच्चों को खाना देने के लिए विभाग की ओर से एमओयू पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी की गई थी। उसके बाद श्रीरतन शुक्ल इंटर कॉलेज में किचन निर्माण शुरू हुआ पर विधानसभा चुनावों के चलते काम रुक गया। मिडडे मील के जिला समन्वयक सौरभ पांडेय ने कहा एमओयू की कुछ शर्तो को बदला गया है। इसके चलते एमओयू पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया दोबारा पूरा करने के निर्देश मिले हैं।

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Web Title:Probe not be arbitrary to food(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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