जागरण संवाददाता, कानपुर : कोयले की कमी की वजह से विद्युत तापघरों में उत्पादन पर असर पड़ रहा है। पनकी में निर्माणाधीन थर्मल पावर प्लांट से उत्पादन शुरू होने पर जहां कम कोयले की खपत होगी वहीं प्रदूषण भी नहीं फैलेगा। यह फर्क पनकी पावर हाउस में 660 मेगावाट सुपर क्रिटिकल यूनिट से होगा। अभी तापघरों में प्रति यूनिट बिजली के उत्पादन में 900 ग्राम कोयले की खपत होती है, पनकी थर्मल पावर प्लांट में उत्पादन पर यह 500 से 550 ग्राम प्रति यूनिट हो जाएगी। पावर प्लांट का निर्माण पूरा होने का लक्ष्य अगले वर्ष मार्च में रखा गया था हालांकि कोरोना संक्रमण की वजह से इस पर असर पड़ा है। अब प्लांट का निर्माण कार्य नंबर 2022 तक पूरा करने का समय निर्धारित किया गया है।

पनकी में 660 मेगावाट प्लांट का निर्माण अप्रैल 2018 में शुरु हुआ था। आठ मार्च 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ मार्च 2018 को निरालानगर ग्राउंड से किया था। पनकी पावर हाउस 5817 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा है। पनकी पावर प्लांट का निर्माण पूरा करने के लिए 46 माह का समय दिया गया था। वर्ष 2020 तथा वर्ष 2021 में कोरोना की दो लहरों व लाकडाउन से निर्माण कार्य प्रभावित हुआ। अब इसका निर्माण अगले वर्ष नंबर में पूरा करने का लक्ष्य है। पावर प्लांट में चिमनी का निर्माण पूरा हो चुका है। बायलर का निर्माण भी हो गया है। पनकी पावर हाउस में 16 किलोमीटर दूर से ट्रीट होकर पानी आएगा। पानी के लिए जलाशय बनाया जा रहा है। पनकी पावर हाउस के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार बताते हैं कि अगले महीने बायलर का हाइड्रोलिक टेस्ट होगा। बायलर के ट्यूब में पानी भरकर उसकी क्षमता जांची जाएगी। पनकी पावर हाउस में निर्माण अगले वर्ष पूरा होने की उम्मीद है।

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