जागरण संवाददाता, कानपुर : गोविंद नगर टी-ब्लाक स्थित शिवम इन्क्लेव अपार्टमेंट में वृद्धा आशा गुप्ता को बंधक बनकर लाखों की डकैती के मामले में पूछताछ से परेशान गार्ड ने दोनों हाथ की नस काट ली थी। पुलिस को गार्ड के अवसाद में होने की जानकारी हुई तो उसे थाने ले जाकर मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग कराई।

बुजुर्ग सिक्योरिटी गार्ड वीरेंद्र कुमार वर्मा ने सादे कपड़ों में पूछताछ करने आने वाले पुलिसकíमयों पर अभद्रता, मारपीट और धमकाने के आरोप लगाए थे। गार्ड का कहना था कि पुलिस के बर्ताव से वह अवसाद में हो गया था, जिससे परेशान होकर उसने आत्मघाती कदम उठाया। गार्ड ने बताया कि शुक्रवार को अस्पताल से छुट्टी होने के बाद थाने से गाड़ी आई थी। वे लोग उसे पटेल चौक के पास एक डाक्टर की क्लीनिक ले गए थे, जहा आधे घटे तक गाड़ी में बैठाकर इंतजार कराया। बाद में डाक्टर के न होने की बात कहकर वापस उसे अपार्टमेंट छोड़ दिया था। वीरेंद्र ने बताया कि शनिवार सुबह फिर से थाने की गाड़ी से पुलिसकर्मी आए और डाक्टर को दिखाने की बात कहकर थाने ले गए। थाने लाकर पुलिसकर्मियों ने बताया कि डाक्टर को यहीं बुलाया गया है। थाने में एक व्यक्ति से मुलाकात कराई, जिसने खुद को मनोचिकित्सक बताया। डाक्टर ने उससे घटनाक्रम के बारे में पूछताछ करने के साथ बदमाशों के आने जाने वाले रास्ते आदि के बारे में जानकारी ली। करीब 20 मिनट की काउंसिलिंग के बाद उसे वापस भेजा गया।

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गार्ड के अवसाद में होने की जानकारी के बाद थाने में मनोचिकित्सक बुलाया गया था, जहा गार्ड की काउंसिलिंग कराई गई। अब वही डाक्टर समय-समय पर उनकी काउंसिलिंग करेंगे।

विकास पाडेय, एसीपी गोविंद नगर

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मनोचिकित्सक ने यह पूछे थे सवाल

- घटना की रात को क्या और कैसे हुआ

- तुम सो क्यों गए थे, गार्ड की नौकरी में रात में जागना होता है

- बदमाश कहां से अंदर आए और कहां से भागे थे

- बदमाशों के भागने के दौरान तुमने उनके हाथ में बैग आदि देखा था क्या

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मांगा गया बसों का ब्योरा

साइकिल लेकर भागे बदमाश झकरकटी बस अड्डे के पिछले गेट से अंदर गए थे। जब सीसीटीवी फुटेज चेक कराए गए तो बसों और यात्रियों की संख्या अधिक होने से बस का डिपो बहुत स्पष्ट नहीं हो पाया है। बस अड्डे से रात दो बजे से सुबह पाच बजे के बीच निकलने वाली बसों का ब्योरा मागा गया है।

Edited By: Jagran