कानपुर से बुंदेलखंड शिफ्ट हुआ पान मसाले का सिंडिकेट, कड़े सरकारी टैक्स नियमों से बचने के लिए नया पैंतरा खोजा
कानपुर से पान मसाला कारोबार बुंदेलखंड और आसपास के जिलों में स्थानांतरित हो गया है। यह बदलाव कड़े सरकारी टैक्स ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, कानपुर। उत्तर प्रदेश में पान मसाला कारोबार का केंद्र रहे कानपुर से अब उत्पादन की धुरी बुंदेलखंड और आसपास के जिलों की तरफ मुड़ गई है। चित्रकूट, बांदा, महोबा, घाटमपुर, हमीरपुर और फतेहपुर जैसे छोटे शहरों में अवैध व अघोषित मसाला पैकेजिंग इकाइयों का संजाल तेजी से फैला है।
कड़े सरकारी टैक्स नियमों और निगरानी से बचने के लिए बड़े मसाला निर्माताओं ने यह नया पैंतरा खोजा है। जीएसटी और उत्पादन नियमों के तहत पान मसाला इकाइयों पर पाउच पैकिंग मशीनों की उत्पादन क्षमता (मशीन कैपेसिटी) के आधार पर भारी टैक्स लागू किया गया है।
कंपनियों को टैक्स चुकाए बिना तैयार माल की आपूर्ति मिलती है, जबकि पकड़े जाने का खतरा पूरी तरह स्थानीय आपरेटर का होता है। इसके लिए काम करने वाले को किसी भी बड़ी पान मसाला कंपनी की एजेंसी दे दी जाती है जिससे दिखावे के तौर पर काम होता रहे।
पान मसाला निर्माताओं पर एक फरवरी से जब स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर के साथ जीएसटी की नई दरें लागू की गईं तो निर्माताओं ने लगभग दो महीने तक उत्पादन रोक दिया था। पान मसाला निर्माताओं की इस दौरान कई दौर में रणनीतिक बैठकें हुईं जिसमें कारोबार की नई रणनीति तय की गई।
पान मसाला कारोबार के जानकारों के मुताबिक तभी तय हो गया था कि अब कारोबार को घोषित उत्पादन स्थलों के बजाय अघोषित ठिकानों से संचालित किया जाएगा। इसके लिए अघोषित फ्रेंचाइजी माडल बनाया गया। घाटमपुर, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, कानपुर देहात और फतेहपुर में पान मसाला कारोबार से जुड़े व्यापारियों को साझेदार बनाया गया लेकिन यह साझेदारी पूरी तरह से मौखिक है। इसमें पान मसाला निर्माता ही सभी उत्पादन सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं और तैयार माल भी अपने नेटवर्क से खपा रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों और पुराने गोदामों और बीहड़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रही इन मिनी-इकाइयों तक जीएसटी टीमों की नियमित निगरानी आसान नहीं है। इसलिए बड़े कारोबारियों ने भी सरकार को संदेश दे दिया है कि अगर टैक्स की वसूली के लिए वह डाल -डाल चलेगी तो कारोबारी अपने बिजनेस को ऐसे कोनों में पहुंचा देंगे जहां मुश्किल से कार्रवाई हो पाएगी और पकड़े जाने पर मुनाफा के मुकाबले कुल जुर्माना बेहद मामूली होगा।
पान मसाला कंपनियों पर लागू नए नियम
राज्यकर मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट संतोष गुप्ता ने बताया कि जीएसटी की नई दर एक फरवरी, 2026 से पान मसाला, सिगरेट और तम्बाकू उत्पादों पर जीएसटी की दर 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर , अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया गया है। पान मसाला के उत्पादन में शामिल मशीनों की क्षमता के आधार पर उपकर का भुगतान किया जाएगा, जो जीएसटी और एक्साइज के अलावा अलग से होगा। पाउच पैकिंग मशीनों पर सीसीटीवी कैमरा भी लगाना था लेकिन इसे हाईकोर्ट ने रोक दिया।
